पीएम मोदी ने अपना स्कीन टोन गहरा किया
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एक्स और इंस्टाग्राम पर जोरदार बहस
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क्या दक्षिणी दिखने के लिए मेकअप किया
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भाजपा ने कहा विपक्ष का कुप्रचार है यह
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु में 23 अप्रैल, 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक चुनावी सभा ने इंटरनेट पर एक अजीबोगरीब विवाद को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह अपुष्ट दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री की त्वचा का रंग सामान्य से अधिक गहरा दिखाई दे रहा था। इन दृश्यों के सामने आने के बाद एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर तीखी बहस और कयासों का दौर शुरू हो गया है।
वायरल क्लिप्स में प्रधानमंत्री मोदी को तमिलनाडु की तेज धूप और खुले मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो वायरल होते ही कई यूजर्स ने दावा करना शुरू कर दिया कि उनकी त्वचा का रंग गहरा लग रहा है। कुछ आलोचकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने यहाँ तक आरोप लगा दिया कि स्थानीय मतदाताओं से जुड़ने और क्षेत्रीय अपील बढ़ाने के लिए जानबूझकर डार्क टोन मेकअप या ब्रोंज़र का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय प्रमाण मौजूद नहीं है।
इंटरनेट पर यह मुद्दा तेजी से गरमाया और देखते ही देखते मीम्स, व्यंग्य और तीखी टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे तमिलनाडु मेकओवर बताते हुए प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाया, तो कुछ ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए की गई दिखावे की राजनीति करार दिया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के समर्थकों ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। विशेषज्ञों और फोटोग्राफरों का तर्क है कि खुली धूप में शूट किए गए वीडियो में लाइटिंग की स्थिति, कैमरे के एंगल और मोबाइल स्क्रीन के कलर सैचुरेशन की वजह से भी त्वचा का रंग अलग दिखाई दे सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में पैठ जमाने की कोशिश कर रही भाजपा के लिए इस तरह के विवाद अनावश्यक ध्यान आकर्षित करते हैं। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर कटाक्ष किए हैं, जबकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह की ओछी बातों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। फिलहाल, इंटरनेट पर इस स्किन टोन विवाद को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच जंग जारी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे केवल कैमरे और रोशनी का प्रभाव माना जा रहा है।