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आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल गिरफ्तार

ममता बनर्जी की पूर्व चेतावनी फिर से सही साबित हुई

  • ममता ने कहा था गिरफ्तारी होगी

  • टीएमसी की चुनावी रणनीति की टीम

  • कोयला घोटाले का पुराना मामला निकाला

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश की दिग्गज राजनीतिक परामर्शदाता फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई है जब देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी चरम पर है। चंदेल को अब दिल्ली की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ केंद्रीय एजेंसी उनकी कस्टोडियल रिमांड की मांग करेगी ताकि मनी लॉन्ड्रिंग की गहरी साजिशों का पर्दाफाश किया जा सके।

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी अचानक नहीं हुई है। इससे करीब दस दिन पहले ईडी ने दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई स्थित आई-पैक के अधिकारियों के कई ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि उस छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनका मिलान करने के बाद चंदेल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कथित कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच से संबंधित है।

आई-पैक को राजनीतिक गलियारों में एक बेहद प्रभावशाली इकाई माना जाता है। इस फर्म ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में द्रमुक जैसे प्रमुख दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की है। चंदेल की गिरफ्तारी पर राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सार्वजनिक मंच से आशंका जताई थी कि चुनाव जीतने की साजिश के तहत केंद्रीय एजेंसियां अब टीएमसी से जुड़े लोगों और सहयोगियों को निशाना बनाएंगी।

जांच का दायरा केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति मामले से भी जुड़ते दिख रहे हैं। 2 अप्रैल को ईडी ने आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार सलाहकार विजय नायर के परिसरों की तलाशी ली थी। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब विजय नायर और आई-पैक के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ रही हैं। संदेह है कि अतीत में इस परामर्श फर्म को किए गए कुछ भुगतानों का स्रोत अवैध हो सकता है। विनेश चंदेल से पूछताछ के दौरान एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि क्या कोयला घोटाले या अन्य कथित भ्रष्टाचार के पैसे का उपयोग चुनावी प्रबंधन या परामर्श सेवाओं के भुगतान के लिए किया गया था।