Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IMD Monsoon Update 2026: कम बारिश और प्रचंड गर्मी करेगी परेशान, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर जारी कि... Trump Warns Iran: 'होर्मुज में जहाज आए तो उड़ा देंगे', ट्रंप की ईरान को दो टूक- अब होगी तेज और बेरहम... Asha Bhosle Funeral : अंतिम विदाई में उमड़ा सैलाब, मनपसंदीदा फूलों से सजे रथ पर निकलीं Asha ताई की य... यूरेनस तक की यात्रा का समय आधा होगा झारखंड की राजनीति में दरार: जेएमएम और कांग्रेस के रिश्तों में कड़वाहट सुप्रीम कोर्ट से एमएसपी की याचिका पर नोटिस जारी चुनाव आयोग का खेल और तरीका अब उजागर हो चुका हम इस विवाद में अंधे नहीं हो सकते: सुप्रीम कोर्ट टाइपिंग की गलतियों के बहाने वोटर काटे गयेः योगेंद्र यादव जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार

जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार

हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप के बाद राज्य सरकार सक्रिय

  • तेलंगना हाईकोर्ट ने दी है यह जमानत

  • खेड़ा के आरोप से नाराज हैं हिमंता

  • असम पुलिस दिल्ली भी पहुंची थी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः असम सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है।

असम पुलिस ने खेड़ा पर मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए हैं। यह मामला उनके उस हालिया दावे के बाद दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असम पुलिस 7 अप्रैल को दिल्ली में खेड़ा के आवास पर पहुंची थी, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद खेड़ा ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। तेलंगाना हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति के. सुजाणा ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की राहत प्रदान की, ताकि इस अवधि के भीतर वे संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में नियमित अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकें।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया, अदालत का यह अवलोकन है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत जो आरोप लगाए गए हैं, उनमें धारा 338 को छोड़कर अन्य सभी अपराधों में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। अदालत ने खेड़ा को संबंधित अदालत में आवेदन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।