Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IMD Monsoon Update 2026: कम बारिश और प्रचंड गर्मी करेगी परेशान, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर जारी कि... Trump Warns Iran: 'होर्मुज में जहाज आए तो उड़ा देंगे', ट्रंप की ईरान को दो टूक- अब होगी तेज और बेरहम... Asha Bhosle Funeral : अंतिम विदाई में उमड़ा सैलाब, मनपसंदीदा फूलों से सजे रथ पर निकलीं Asha ताई की य... यूरेनस तक की यात्रा का समय आधा होगा झारखंड की राजनीति में दरार: जेएमएम और कांग्रेस के रिश्तों में कड़वाहट सुप्रीम कोर्ट से एमएसपी की याचिका पर नोटिस जारी चुनाव आयोग का खेल और तरीका अब उजागर हो चुका हम इस विवाद में अंधे नहीं हो सकते: सुप्रीम कोर्ट टाइपिंग की गलतियों के बहाने वोटर काटे गयेः योगेंद्र यादव जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार

टाइपिंग की गलतियों के बहाने वोटर काटे गयेः योगेंद्र यादव

सामाजिक कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग की गलतियों पर इशारा किया

  • के और एच के बीच का अंतर

  • अब चुनाव आयोग अपनी सफाई दे

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से मिलान हो

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः स्वराज इंडिया के संस्थापक सदस्य और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने ऐसे चार मतदाताओं के उदाहरण दिए जो न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच के दायरे में थे और बाद में उनके नाम हटा दिए गए। यादव ने बताया कि उन्हें इन मामलों की जानकारी कोलकाता के एक मित्र के माध्यम से मिली।

यादव ने रविवार दोपहर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह बालीगंज के एक मतदाता का मामला है। मतदाता द्वारा दिए गए और उसके पासपोर्ट में दर्ज उसके पिता के नाम की वर्तनी इफ्तिखारुल है। लेकिन 20 साल पुरानी मतदाता सूची में यह इफ्तिक हारूल के रूप में दर्ज है—वर्तनी वही है, बस के और एच के बीच एक स्पेस है। भारत निर्वाचन आयोग ने इसे तार्किक विसंगति का मामला बताया। इस विसंगति के आधार पर मतदाता का नाम जांच के दायरे में रखा गया और अंततः सूची से हटा दिया गया।

यादव ने चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आयोग को अपनी स्वयं की विसंगतियों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार निहित है, इसलिए किसी राज्य में मतदाताओं की संख्या वहां की वयस्क आबादी के लगभग बराबर होनी चाहिए।

उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जनसंख्या प्रक्षेपण विशेषज्ञ समूह के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विशेष गहन संशोधन से पहले बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.67 करोड़ होनी चाहिए थी, जबकि उस समय मतदाता सूची में 7.66 करोड़ नाम थे। यादव ने कहा, यह मिलान लगभग 99.67 प्रतिशत था। मैंने किसी भी राज्य में इतना सटीक मिलान नहीं देखा है। बंगाल की मतदाता सूची आदर्श थी, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि इसमें फर्जी नाम भरे हुए थे।