निगरानी ने रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया
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पुराना खिलाड़ी पर नया खेल में फंसा
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सत्तर हजार की रिश्वत ले रहा था
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कई डीएम का प्रिय पीए रह चुका है
दीपक नौरंगी
भागलपुरः भागलपुर कलेक्ट्रेट के गलियारों में साहब के खास माने जाने वाले स्टेनो प्रेम कुमार का लक्ष्मी प्रेम आखिरकार उन्हें ले डूबा। सोमवार को बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक सटीक घेराबंदी करते हुए एसडीएम कार्यालय में तैनात स्टेनो प्रेम कुमार को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तार स्टेनो प्रेम कुमार का इतिहास विवादों और भ्रष्टाचार की कहानियों से भरा रहा है। यह वही प्रेम कुमार है जिसे बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में एसआईटी ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कई जिलाधिकारियों के साथ पीए के तौर पर काम कर चुके प्रेम कुमार के बारे में चर्चा है कि बिना दक्षिणा के उनके पास कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती थी। निगरानी विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि एक सरकारी कार्य के एवज में वह भारी भरकम राशि की मांग कर रहे हैं, जिसके सत्यापन के बाद डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार के नेतृत्व में इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
निगरानी टीम ने केवल स्टेनो को ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी मयंक कुमार को भी मौके से गिरफ्तार किया है। मयंक इस घूसखोरी के खेल में बिचौलिए और सहायक की भूमिका निभा रहा था। सृजन जैसे बड़े घोटाले में जेल जा चुके कर्मचारी की तैनाती एसडीएम कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण पद पर दोबारा कैसे हुई? इस सवाल ने कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
चर्चा है कि प्रेम कुमार ने दशकों तक कई बड़े अधिकारियों के साथ रहकर भ्रष्टाचार का एक अभेद्य साम्राज्य खड़ा कर लिया था। अब सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी इनके पुराने कारनामों की गहराई से जांच करने की मांग उठ रही है।
निगरानी विभाग अब इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि इस रिश्वतकांड के तार क्या विभाग के किसी बड़े साहब से भी जुड़े हैं? फिलहाल, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। भागलपुर में यह चर्चा आम है कि जिस भ्रष्ट तंत्र पर हाथ डालने से लोग कतराते थे, आज निगरानी की मुस्तैदी ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।