Breaking News in Hindi

शतक लगाने की तरफ आगे बढ़ रही है भारतीय मुद्रा

पहली बार 95 का आंकड़ा भी पार कर गया रुपया

  • सरकारी बातों पर बाजार को भरोसा नहीं

  • आरबीआई के हस्तक्षेप का भी असर नहीं

  • डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर स्थिति

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय मुद्रा रुपया सोमवार, 30 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.20 पर पहुँच गया। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिए उठाए गए हालिया कदमों के बावजूद वैश्विक दबाव और विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने रुपये को 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार धकेल दिया।

शुक्रवार देर रात आरबीआई ने सट्टेबाजी और अत्यधिक अस्थिरता को कम करने के लिए बैंकों पर नेट ओपन रुपी पोजीशन की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय कर दी थी। बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का पालन करना है। इस कदम का उद्देश्य बैंकों को घरेलू बाजार में डॉलर बेचने के लिए मजबूर करना था, जिससे रुपये को सहारा मिल सके। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी आर्थिक कारक वर्तमान में रुपये के लिए प्रतिकूल बने हुए हैं, जिससे आरबीआई के हस्तक्षेप का असर केवल कुछ समय के लिए ही रहा।

रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ गया है और चालू खाता घाटा अधिक हो गया है।

वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजारों से भारी निकासी की है। अकेले मार्च के महीने में रुपया 4 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जो पिछले सात वर्षों में इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन है। मुद्रा के साथ-साथ इक्विटी मार्केट में भी भारी गिरावट देखी गई है। सोमवार को निफ्टी 50 में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे खराब मासिक गिरावट की ओर अग्रसर है।

विश्लेषकों का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती या विदेशी फंडों का प्रवाह वापस भारत की ओर नहीं मुड़ता, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया इसी तरह कमजोर होता रहा, तो देश में मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है, क्योंकि आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। फिलहाल बाजार की नजरें आरबीआई के अगले बड़े कदम और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर टिकी हैं।