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प्रोन्नति पैनल से आरबीआई गर्वनर को हटाने का स्पष्ट निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य अधिकारी और वर्तमान भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज के खिलाफ लक्षित विभागीय प्रतिशोध की कड़ी निंदा की है। न्यायालय ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में सदस्य (लेखाकार) के रूप में उनकी नियुक्ति को रोकने वाले चयन समिति के निर्णय को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले को प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग और व्यक्तिगत प्रतिशोध का एक घृणित उदाहरण बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि चयन समिति में एक वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति ने निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए और ‘पक्षपात की उचित आशंका’ पैदा की। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में इस अधिकारी के संवेदनशील पद की गरिमा बनाए रखने के लिए सीधे नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टिंग से स्पष्ट है कि यह संदर्भ संजय मल्होत्रा का है। संजय मल्होत्रा, जो दिसंबर 2022 से दिसंबर 2024 तक राजस्व सचिव थे, वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं।

मामले की पृष्ठभूमि कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज, जो पहले सेना में थे और बाद में आईआरएस अधिकारी बने, लंबे समय से विभागीय शत्रुता का शिकार रहे हैं। चयन समिति ने उनकी नियुक्ति को अवरुद्ध कर दिया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने अनुचित माना है। अदालत ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि एक योग्य अधिकारी को इस तरह लक्षित करना प्रशासनिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

अदालत का कड़ा रुख न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब चयन प्रक्रिया में ऐसे व्यक्ति शामिल हों जिनके साथ उम्मीदवार का पिछला विवाद रहा हो, तो वह प्रक्रिया अपनी वैधानिकता खो देती है। अदालत ने अब केंद्र को निर्देश दिया है कि वह संजय मल्होत्रा (वर्तमान आरबीआई गवर्नर) को शामिल किए बिना चयन प्रक्रिया को फिर से संचालित करे या सुधार करे। यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और एक पूर्व सैनिक के सम्मान की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।