Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पनीर के बैक्टीरिया पेट की सेहत के लिए वरदान दिल्ली पेलेट गन मामले में पहली FIR दर्ज: राहुल गांधी के 8 घंटे धरने के बाद BNS 118 व 125 में केस एक शब्द का गलत प्रयोग और मोदी की परेशानी पेलेट गन मामले में FIR की मांग पर संसद मार्ग थाने में धरने पर बैठे राहुल गांधी, BJP का पलटवार मसूरी-कैंपटी रोड पर भूस्खलन का कहर: सांझा दरबार के पास मकान और दुकान पूरी तरह ध्वस्त दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन: 2,011 फैक्ट्रियों की जांच, 33 पर क्लोजर ऑर्डर और 44 पर लगा भारी जु... 'प्रति व्यक्ति आय में भारत बांग्लादेश से भी पिछड़ा': अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला 26/11 मुंबई हमला: हाफिज सईद और लखवी समेत 6 भगोड़ों पर चलेगा इन-एब्सेंटिया ट्रायल, MHA ने इंटरपोल से ... दिमागी नक्सल का वायरस कोलकाता भी आ पहुंचा सहारनपुर में व्यक्ति की चोटी काटकर की मारपीट: फसल पर चलाया ट्रैक्टर, SSP ऑफिस पहुंचे ब्राह्मण समाज क...

डिएगो गार्सिया पर ईरानी मिसाइल से पुष्टि

ईरान की सैन्य तैयारियों का गलत आकलन हुआ था

लंदनः ईरान ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक द्वीप डिएगो गार्सिया पर मिसाइलें दागकर संघर्ष को एक नया और खतरनाक मोड़ दे दिया है। यह द्वीप ब्रिटेन के नियंत्रण में है और यहाँ अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है। हालांकि, बेस को निशाना बनाने का यह प्रयास असफल रहा, लेकिन ब्रिटेन ने ईरान के इन लापरवाह हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है।

यह हमला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो ईरान की घोषित मिसाइल क्षमता (2,000 किमी) से कहीं अधिक है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने संभवतः अपने सिमोर्ग अंतरिक्ष रॉकेट का उपयोग किया है ताकि इतनी लंबी दूरी तक मार की जा सके।

अमेरिका डिएगो गार्सिया को मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में सुरक्षा अभियानों के लिए एक अपरिहार्य मंच मानता है। यहाँ लगभग 2,500 अमेरिकी सैन्य कर्मी तैनात हैं। पिछले साल, अमेरिका ने यहाँ परमाणु क्षमता संपन्न B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स तैनात किए थे।

शुरुआत में ब्रिटेन ने इस बेस का उपयोग ईरान पर हमलों के लिए करने से मना कर दिया था, लेकिन ईरान द्वारा पड़ोसी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर किए गए हमलों के बाद, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी बमवर्षकों को यहाँ से सीमित रक्षात्मक अभियानों के लिए उड़ान भरने की अनुमति दे दी है। इस पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन अपने अड्डों का उपयोग ईरान के खिलाफ करने देकर अपने नागरिकों की जान खतरे में डाल रहा है।

एक विवादित द्वीप समूह और राजनीतिक घमासान: डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का हिस्सा है, जिस पर 1814 से ब्रिटेन का कब्जा है। 1960 और 70 के दशक में, ब्रिटेन ने सैन्य अड्डा बनाने के लिए यहाँ के लगभग 2,000 स्थानीय निवासियों को जबरन बेदखल कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र ने ब्रिटेन से इस औपनिवेशिक प्रशासन को समाप्त कर संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का आग्रह किया है। पिछले साल ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत ब्रिटेन संप्रभुता सौंप देगा लेकिन 99 वर्षों के लिए बेस को लीज पर वापस लेगा।

इस समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी मूर्खता करार दिया है। ट्रंप का मानना है कि द्वीपों पर नियंत्रण छोड़ने से वहां चीन और रूस का प्रभाव बढ़ सकता है। ट्रंप की नाराजगी और ब्रिटेन द्वारा शुरुआत में बेस के उपयोग पर लगाई गई पाबंदी के कारण, ब्रिटेन की संसद में इस समझौते को फिलहाल रोक दिया गया है। डिएगो गार्सिया अब न केवल ईरान के मिसाइल निशाने पर है, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक रस्साकशी का केंद्र भी बन गया है।