कोलकाता उच्च न्यायालय ने बैंक खाता फ्रीज मामले में कार्रवाई की
दलील बदलने से नाराज हाई कोर्ट
खुद बैंक अफसर जाकर यह काम करें
सुधर जाइए वरना मैनेजर को हाजिर करेंगे
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड्स को अचानक फ्रीज किए जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान बैंक अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट निर्देश दिए कि बैंक अपनी बयानबाजी और स्थिति को बार-बार न बदले।
न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में सुनवाई के दौरान सांसद के वकील ने पक्ष रखते हुए बताया कि उनके मुवक्किल के दो क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने की आधिकारिक समय-सीमा अभी आगामी दिसंबर तक वैध है। मामले में जब बैंक अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने पहले केवाईसी प्रक्रिया और बाद में प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामले का हवाला दिया, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।
बैंक द्वारा बार-बार बयान बदलने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए न्यायमूर्ति ने तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने पूछा कि आज के आधुनिक दौर में जब अधिकांश बैंकिंग कार्य और केवाईसी की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से भी आसानी से पूरी की जा सकती है, तो क्या बैंक अधिकारी सिर्फ संबंधित सांसद का चेहरा देखना चाहते हैं?
पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि बिना ग्राहक को किसी तरह की पूर्व सूचना दिए उसके बैंक खातों को कैसे बंद किया जा सकता है। बैंक की ओर से तर्क दिया गया कि कुछ आंतरिक समस्याओं के कारण यह कदम उठाया गया है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस पर अदालत ने बैंक को चेतावनी दी कि वे अपनी स्थिति बदलने की कोशिश न करें, अन्यथा उन्हें मजबूरन बैंक मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब करना पड़ेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दूसरे दौर की सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि बैंक का कोई जिम्मेदार अधिकारी गुरुवार को खुद अभिषेक बनर्जी के आवास पर जाकर सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा, ताकि केवाईसी प्रक्रिया को तुरंत पूरा किया जा सके। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई अब आगामी सोमवार को होगी।