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उल्फा (आई) उग्रवादियों ने असम पुलिस कैंप पर हमला किया

कथित ड्रोन हमलों का जवाब देने की बात

  • हमले में चार जवान घायल हुए हैं

  • सरमा और शाह ने घटना की निंदा की

  • असमिया पहचान को लेकर चुनावी खींचतान

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम के तिनसुकिया जिले में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी चुनौती मिली है। रविवार तड़के तिनसुकिया के जगुन 10 माइल इलाके में स्थित असम पुलिस कमांडो कैंप पर उग्रवादियों ने रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड से हमला किया। इस हमले में चार सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायलों की स्थिति अब स्थिर है।

प्रतिबंधित संगठन उल्फा (इंडिपेंडेंट) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे ऑपरेशन बुजोनी का नाम दिया है। संगठन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि यह हमला असम पुलिस द्वारा उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई और पिछले साल भारत-म्यांमार सीमा पर उनके कैंपों पर किए गए ड्रोन हमलों का जवाब है। उल्फा (आई) ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार आने के बाद उन्होंने शांति की पहल की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उनके सदस्यों को निशाना बनाना जारी रखा। मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उग्रवाद-विरोधी तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है।

इस सुरक्षा संकट के बीच, राज्य की राजनीति में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सरमा ने हाल ही में कूकी और मैतेई समुदायों के साथ हुए समझौते पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि परिषद की सीटों को 28 से बढ़ाकर 40 किया जा सकता है, जिससे सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

वहीं, असम की क्षेत्रीय राजनीति के अस्तित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। असम गण परिषद जैसी पार्टियां, जो कभी अवैध घुसपैठ के खिलाफ असम आंदोलन का चेहरा थीं, अब राष्ट्रीय दलों की छोटी सहयोगी बनकर रह गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने जाति, माटी, भेटी (समुदाय, जमीन और घर) जैसे नारों के साथ स्थानीय पहचान के मुद्दे को अपने पक्ष में कर लिया है, जिससे क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता कम हुई है।

दूसरी ओर, चुनाव से पहले कांग्रेस ने भी भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि भाजपा अब खुद कांग्रेस-युक्त हो गई है क्योंकि उसने कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं को शामिल कर लिया है, जिससे उनके अपने कार्यकर्ताओं में असंतोष है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनाव प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व में मजबूती से लड़ेंगे। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, असम में उग्रवाद, जातीय पहचान और राजनीतिक दलबदल जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।