ट्रंप ने मध्य पूर्व में अपनी सेना की तैनाती बढ़ायी
वाशिंगटनः मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि पेंटागन क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त मरीन सैनिकों की तैनाती कर रहा है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सैन्य सहायता भेजने में हिचकिचाहट दिखाने वाले मित्र देशों को स्पष्ट रूप से कायर कहकर संबोधित किया है।
सामरिक और आर्थिक संकट होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवन रेखा के समान है। दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। लगभग तीन सप्ताह पहले जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के विरुद्ध युद्ध की शुरुआत की, तब से यह जलमार्ग अधिकांश शिपिंग के लिए प्रभावी रूप से बंद है। इस नाकाबंदी के परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है।
राहत के प्रयास और प्रतिबंधों में ढील ऊर्जा संकट से निपटने और आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक यू-टर्न लिया है। प्रशासन ने घोषणा की है कि वह ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा ताकि युद्ध शुरू होने के बाद से टैंकरों में फंसे हुए 14 करोड़ बैरल तेल की बिक्री की जा सके। उल्लेखनीय है कि इससे पहले प्रशासन ने इसी तरह की राहत रूसी तेल के लिए भी दी थी। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को नीचे लाना है, जो वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए शॉक की स्थिति पैदा कर रही हैं।
युद्ध के मैदान में स्थिति भयावह होती जा रही है। अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश हताहत ईरान और लेबनान में हुए हैं। अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर असंतोष और भय बढ़ रहा है। लगभग दो-तिहाई अमेरिकियों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध के लिए सैनिकों को आदेश दे सकते हैं। हालांकि, केवल 7 प्रतिशत जनता ही ऐसे किसी जमीनी हमले का समर्थन कर रही है।