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ईरान ने स्टील्थ विमान को मार गिराया, देखें वीडियो

चीन के बाद अब अमेरिकी युद्धक विमान की पोल खुली

तेहरानः मध्य-पूर्व में जारी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य श्रेष्ठता की जंग अब एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गई है। 19 मार्च 2026 को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा किए गए एक चौंकाने वाले दावे ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

ईरान के आधिकारिक मीडिया और आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके उन्नत वायु रक्षा तंत्र ने मध्य ईरान के हवाई क्षेत्र में अमेरिका के सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एफ-35 लाइटनिंग-2 को सफलतापूर्वक मार गिराया है। ईरान का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी देश ने अमेरिकी स्टील्थ तकनीक के गौरव को युद्ध के मैदान में धूल चटाई है। ईरान इसे अपनी रक्षा प्रणाली की महान उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है।

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दूसरी ओर, अमेरिकी केंद्रीय कमान और पेंटागन ने इस घटना पर एक अलग विवरण प्रस्तुत किया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के ऊपर एक लड़ाकू मिशन के दौरान एक एफ-35 विमान को महत्वपूर्ण नुकसान पहुँचा था। हालांकि, अमेरिका ने विमान के पूरी तरह नष्ट होने या गिरने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, हमले के बावजूद पायलट ने असाधारण सूझबूझ दिखाई और क्षतिग्रस्त विमान की सफलतापूर्वक इमरजेंसी लैंडिंग कराई। रिपोर्ट के अनुसार पायलट सुरक्षित है और विमान का विश्लेषण किया जा रहा है।

यह घटना केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। वर्तमान संघर्ष में अब तक अमेरिका के लगभग 11 से 12 एमक्यू -9 रीपर ड्रोन्स के गिराए जाने की खबरें हैं। साथ ही, 18 मार्च को अमेरिका के अति-गोपनीय स्टील्थ जासूसी ड्रोन की ग्रीस में हुई आपातकालीन लैंडिंग ने भी अमेरिकी वायुसेना की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। उल्लेखनीय है कि साल 2011 में भी ईरान ने अमेरिका के आर क्यू -170 सेंटिनल स्टील्थ ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जरिए अपने नियंत्रण में लेकर सुरक्षित उतार लिया था।

वर्तमान स्थिति में दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास है। जहाँ ईरान इसे अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन मान रहा है, वहीं अमेरिका इसे एक तकनीकी क्षति बता रहा है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस बात पर एकमत हैं कि स्टील्थ विमानों को निशाना बनाने की ईरान की बढ़ती क्षमता ने भविष्य के हवाई युद्ध के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।