तेल और गैस संयंत्रों पर हमला से स्थिति बिगड़ी
दुबईः मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। ईरान के दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायली हमले के बाद जवाबी कार्रवाई का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों को हिलाकर रख दिया है।
गुरुवार को कतर, सऊदी अरब और कुवैत के प्रमुख तेल और गैस ठिकानों पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। इस तनाव की शुरुआत तब हुई जब इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण दक्षिण पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस कॉम्प्लेक्स, रास लफ्फान पर मिसाइलें दाग दीं। इस भीषण हमले के बाद रास लफ्फान में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह हमला इस बात का पुख्ता सबूत है कि ईरान केवल अमेरिकी हितों को नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को निशाना बना रहा है। युद्ध की आग केवल कतर तक सीमित नहीं रही। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह की सामरेफ रिफाइनरी पर एक ड्रोन क्रैश हुआ है।
वहीं, कुवैत की मीना अब्दुल्ला और मीना अल-अहमदी रिफाइनरियों पर भी ड्रोन हमलों के कारण भीषण आग लग गई। इन दोनों रिफाइनरियों की संयुक्त क्षमता 8 लाख बैरल प्रतिदिन है, जिसका ठप होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा झटका है। संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा करार दिया है।
इन हमलों की खबर फैलते ही वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। एक समय कीमतें 10 फीसद की बढ़त के साथ $119 प्रति बैरल तक जा पहुँचीं, हालांकि बाद में यह थोड़ा गिरकर 112 डॉलर पर टिकीं। यूरोपीय गैस की कीमतों में भी 35 फीसद की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मध्य पूर्व में इस युद्ध के समाप्त होने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने कतर और अन्य ऊर्जा केंद्रों पर हमले बंद नहीं किए, तो उसे अमेरिका की प्रचंड प्रतिक्रिया का सामना करना होगा। दूसरी ओर, तेहरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर फिर से हमला हुआ, तो वह शून्य संयम की नीति अपनाएगा। हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और इन हमलों ने दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।