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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए नए टैरिफ ढांचे का इंतजार

कई मुद्दों पर दोनों पक्षों में चर्चा अभी जारी है

  • फरवरी में बढ़ गया है व्यापार घाटा

  • निर्यात का रिकार्ड भी बेहतर नहीं

  • मध्यपूर्व के युद्ध का भी असर

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आधिकारिक मुहर तभी लगेगी, जब दोनों देश नए टैरिफ ढांचे को अंतिम रूप देकर लागू कर देंगे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को स्पष्ट किया कि समझौते की बारीकियों पर अभी भी गहन चर्चा जारी है और औपचारिक हस्ताक्षर नई शुल्क व्यवस्था के प्रभावी होने के बाद ही किए जाएंगे।

व्यापारिक आंकड़ों की स्थिति सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी माह में भारत के निर्यात प्रदर्शन में मामूली गिरावट देखी गई है। वार्षिक आधार पर माल निर्यात 0.81फीसद घटकर 36.61 अरब डॉलर रहा। इसके विपरीत, आयात में 24.11फीसद की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल के 51.33 अरब डॉलर से बढ़कर इस बार 63.71 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आयात में इस तेज उछाल के कारण फरवरी में व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है।

सालाना प्रदर्शन और चुनौतियां मासिक गिरावट के बावजूद, चालू वित्त वर्ष (2025-26) के दौरान भारत का समग्र निर्यात प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। अप्रैल से फरवरी की अवधि में कुल निर्यात 1.84फीसद की वृद्धि के साथ 402.93 अरब डॉलर रहा, जबकि इसी दौरान आयात 8.53फीसद बढ़कर 713.53 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह आंकड़े देश के भीतर मजबूत घरेलू मांग की ओर संकेत करते हैं।

पश्चिम एशिया संकट का साया वाणिज्य सचिव ने आगामी समय के लिए सतर्क रहने की चेतावनी दी है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के आसपास समुद्री रास्तों में पैदा हुई बाधाओं और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण मार्च के निर्यात आंकड़ों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए इस व्यवधान से माल ढुलाई महंगी और कठिन हो गई है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।