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हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी

ईरान का भरोसा दिलाने के बाद वास्तविक अमल भी जारी

रियाधः मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों और आसमान छूते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत और कूटनीतिक जीत की खबर आई है। भारत के दो विशाल एलपीजी टैंकर, शिवालिक और नंदा देवी, शनिवार शाम को दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य  को सुरक्षित रूप से पार करने में सफल रहे। यह सफलता ऐसे समय में मिली है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और ड्रोन हमलों के कारण व्यापारिक जहाजों का आवागमन लगभग ठप होने की कगार पर है।

खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हवाई हमले और फुजैराह बंदरगाह पर संदिग्ध विस्फोटों के बाद इन भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा था। इस जटिल स्थिति में भारतीय नौसेना ने अपनी मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट नीति के तहत तत्परता दिखाई।  आईएनएस कोलकाता ने दोनों टैंकरों को अपनी सुरक्षा घेरे में लिया और उन्हें एस्कॉर्ट करते हुए हॉर्मुज के संकरे रास्ते से बाहर निकाला। जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए नौसेना के समुद्री गश्ती विमानों और ड्रोन के जरिए आसमान से भी निरंतर निगरानी रखी गई।

सैन्य सुरक्षा के साथ-साथ, भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी परदे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई। भारत ने तेहरान, वाशिंगटन और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ निरंतर कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारतीय ध्वज वाले इन वाणिज्यिक जहाजों को किसी भी पक्ष द्वारा गलतफहमी या प्रतिशोधात्मक हमले का शिकार न बनाया जाए।

यह भारत की संतुलित विदेश नीति का ही परिणाम है कि इतने तनावपूर्ण माहौल में भी भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला। ये दोनों टैंकर अब ओमान की खाड़ी के खुले समुद्र में प्रवेश कर चुके हैं और अगले कुछ दिनों में गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर लंगर डालेंगे। भारत अपनी कुल एलपीजी और कच्चे तेल की खपत का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। आपूर्ति में थोड़ी सी भी देरी देश में ईंधन की कीमतों और महंगाई को प्रभावित कर सकती थी।

यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय नौसेना अब केवल अपने तटों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे परे अपने वाणिज्यिक हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। शिवालिक और नंदा देवी की सुरक्षित वापसी भारतीय नौसेना की बढ़ती समुद्री ताकत और संकट के समय भारत की मजबूत कूटनीतिक पकड़ को दर्शाती है। ऐसे समय में जब खाड़ी क्षेत्र एक महायुद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया है।