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बिड़ला से कहा इसे पार्टी कार्यालय ना समझें

राहुल गांधी के साथ खुलकर खड़ी हो गयी टीएमसी भी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार को सदन में तीखी बहस हुई। सत्ता पक्ष पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने एकजुट होकर सरकार और अध्यक्ष की कुर्सी पर निशाना साधा।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में पक्षपात का मुद्दा उठाते हुए कहा, जब भी हम बोलने के लिए खड़े होते हैं, हमें रोक दिया जाता है। लोकसभा किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष ने भी कड़ा रुख अपनाया।

उन्होंने कहा कि संसद में लोकतंत्र नाममात्र का बचा है क्योंकि विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है। जाधवपुर की सांसद ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, संसद को पार्टी कार्यालय न बनाएं। यह अब नीति-निर्धारण का मंच नहीं, बल्कि एक विज्ञापन मंच बनकर रह गया है।

सयानी घोष ने अपने संबोधन में राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के भाषणों में बार-बार डाली जा रही बाधाओं का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को सदन में किसी पुस्तक या दस्तावेज का संदर्भ देने से रोका जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष के पसंदीदा सदस्यों को इसकी पूरी छूट दी जा रही है।

उन्होंने फरवरी के बजट सत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से चीन के मुद्दे पर कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करनी चाहीं, तो उन्हें संसदीय नियमों का हवाला देकर रोक दिया गया। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को गांधी-नेहरू परिवार पर निशाना साधने के लिए बिना किसी रोक-टोक के संदर्भ देने की अनुमति दी गई।

भाजपा की ओर से रविशंकर प्रसाद ने अविश्वास प्रस्ताव को पीड़ादायक बताते हुए कहा कि अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव का उपयोग किसी नेता के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर उन्हें बहुत नपे-तुले शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।