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रमेश विधुड़ी के प्रकरण पर सारे शब्द दोहराये सांसद ने

भगवान के नाम पर चले जाइए: महुआ मोइत्रा

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। मोइत्रा ने इस बहस की शुरुआत करते हुए इसे दैवीय न्याय करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उन्हें इसी सदन से निष्कासित किया गया था और आज उन्हें उसी अध्यक्ष के खिलाफ बोलने का मौका मिला है। मोइत्रा ने तीखे शब्दों में कहा, आप कर्म से भाग नहीं सकते। जिस महिला सांसद को इस स्त्री-विरोधी सरकार ने अवैध रूप से प्रताड़ित किया और एक ऐसी एथिक्स कमेटी द्वारा निष्कासित किया जिसके पास निष्कासन की शक्ति नहीं थी, आज वही सांसद इस अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू कर रही है।

महुआ मोइत्रा ने ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में सदन की गरिमा शब्द का मजाक बन गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अध्यक्ष महोदय अक्सर सदन की गरिमा की बात करते हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जैसे ही अध्यक्ष सदन में आते हैं, गरिमा सदन से बाहर चली जाती है।

मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बिरला ने विपक्ष के सदस्यों के माइक बंद करने की कला में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसों से चलने वाले संसद टीवी पर विपक्षी नेताओं के भाषणों को ब्लैकआउट कर दिया जाता है और पूछने पर इसे तकनीकी खामी बता दिया जाता है। मोइत्रा ने अध्यक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार ने संसदीय लोकतंत्र को सर्कस बना दिया है, तो अध्यक्ष उसके सहयोगी रिंग मास्टर की भूमिका निभा रहे हैं।

अपने भाषण के दौरान मोइत्रा ने भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा दानिश अली के खिलाफ की गई सांप्रदायिक टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, जब बिधूड़ी ने एक साथी सांसद को अपशब्द कहे, तब आपने कुछ नहीं किया। आपने केवल दानिश भाई को ही नहीं, बल्कि इस देश के 20 करोड़ मुसलमानों को निराश किया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मणिपुर जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा तभी संभव हुई जब अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। मोइत्रा ने अंत में कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, ईश्वर के नाम पर, अब आप पद छोड़ दीजिए। उन्होंने बिरला पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने कभी भी विपक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया।