मणिपुर के अस्पताल में ग्रेनेड मिलने की चर्चा से सनसनी
-
आरएएनपीओ ने संयम की अपील की
-
मेघालय में आपदा राहत कोष का दुरुपयोग
-
रायजोर दल से कांग्रेस की वार्ता अभी जारी
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: असम की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व में चार विपक्षी दलों ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन को अंतिम रूप दे दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने घोषणा की कि कांग्रेस, सीपीआई (एम), असम जातीय परिषद और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस मिलकर राज्यव्यापी संयुक्त अभियान चलाएंगे।
गठबंधन का प्राथमिक उद्देश्य भाजपा की “नफरत भरी राजनीति”, भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ एकजुट होना है। हालांकि अभी सीट-शेयरिंग का पूर्ण विवरण नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस ने 42 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि अखिल गोगोई की रायजोर दल सहित अन्य विपक्षी पार्टियों के लिए गठबंधन के दरवाजे खुले हैं।
विपक्ष का मानना है कि बोहाग बिहू से पहले अप्रैल के मध्य में चुनाव होने की संभावना है, इसलिए अब सीधे जनता के बीच जाना अनिवार्य है।वर्तमान में 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगियों का बहुमत है, जबकि कांग्रेस के पास 26 सीटें हैं। विपक्ष को उम्मीद है कि यह नया मोर्चा सत्ता विरोधी लहर को भुनाने में सफल होगा।
मणिपुर के इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सायंसेज में शनिवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रशासनिक ब्लॉक के प्रवेश द्वार पर एक जीवित विस्फोटक उपकरण पाया गया। माना जा रहा है कि यह विस्फोटक संस्थान के एक वरिष्ठ कर्मचारी को डराने के उद्देश्य से वहां रखा गया था। इस घटना ने न केवल चिकित्सा समुदाय बल्कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, लेकिन इस घटना ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को देखते हुए रालन अघुनाका नागा पब्लिक ऑर्गनाइज़ेशन (आरएएनपीओ) ने असम और नागालैंड के सीमावर्ती निवासियों से धैर्य और संयम बरतने की अपील की है। संगठन ने याद दिलाया कि दशकों पुराना यह सीमा विवाद वर्तमान में उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के विचाराधीन है। संगठन ने स्पष्ट किया कि सीमा के दोनों ओर हो रहे विकास कार्य संबंधित सरकारों की अनुमति से उनके प्रशासनिक दायरे में ही किए जा रहे हैं, जिन्हें किसी विवाद का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए।
सीएजी की एक रिपोर्ट में मेघालय सरकार के आपदा राहत के पैसे को हैंडल करने के तरीके पर सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए रखे गए फंड का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया गया। ऑडिट से पता चला कि स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फंड से फिर से 12.15 करोड़ रुपये से ज़्यादा दूसरे राज्यों को फाइनेंशियल मदद देने और शिलांग में सरकारी सेक्रेटेरिएट में सफाई के खर्चों को कवर करने जैसे कामों पर खर्च किए गए। रिव्यू में पाया गया कि आपदा राहत पूल से 20 करोड़ रुपये चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड में भेज दिए गए।