हड्डी उपचार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम
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प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया से प्रेरणा
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यह एक अस्थायी ढांचा बनाता है
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नैनोस्केल पर विश्व रिकॉर्ड है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः दुर्घटनाओं या ट्यूमर के कारण जब हड्डियाँ गंभीर रूप से टूट जाती हैं, तो उन्हें जोड़ने के लिए डॉक्टरों को अक्सर इम्प्लांट का सहारा लेना पड़ता है। वर्तमान में इसके लिए रोगी की अपनी हड्डी (ऑटोग्राफ्ट) या धातु और सिरेमिक का उपयोग किया जाता है। लेकिन ऑटोग्राफ्ट के लिए अतिरिक्त सर्जरी की आवश्यकता होती है, जबकि धातु के इम्प्लांट प्राकृतिक हड्डी की तुलना में अधिक सख्त होने के कारण समय के साथ ढीले पड़ सकते हैं।
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हड्डी की संरचना अत्यंत जटिल होती है, जिसमें सूक्ष्म सुरंगें और खोखले स्थान होते हैं। ईटीएच ज्यूरिख में बायोमटेरियल्स इंजीनियरिंग के प्रोफेसर जिओ-हुआ किन के अनुसार, सफल उपचार के लिए इम्प्लांट में जैविक प्रक्रियाओं का समावेश होना अनिवार्य है। इसी चुनौती को देखते हुए, किन और प्रोफेसर राल्फ मुलर की टीम ने एक विशेष हाइड्रोजेल विकसित किया है, जो भविष्य में हड्डियों के उपचार का तरीका बदल सकता है।
जब कोई हड्डी टूटती है, तो शरीर तुरंत सख्त ऊतक नहीं बनाता। पहले एक नरम और पारगम्य संरचना बनती है, जिसे हेमेटोमा कहा जाता है। यह एक अस्थायी मचान की तरह काम करता है, जो पोषक तत्वों और मरम्मत करने वाली कोशिकाओं को अंदर आने देता है। नया हाइड्रोजेल इसी शुरुआती चरण की नकल करता है।
यह हाइड्रोजेल 97 प्रतिशत पानी और 3 फीसद बायोकम्पैटिबल पॉलीमर से बना है। इसे ठोस बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने इसमें दो विशेष अणु जोड़े हैं। जब इस पर एक निश्चित तरंगदैर्ध्य की लेजर किरणें पड़ती हैं, तो पॉलीमर की श्रृंखलाएं आपस में जुड़कर एक ठोस संरचना बना लेती हैं। जो हिस्सा लेजर के संपर्क में नहीं आता, वह नरम रहता है और उसे बाद में हटाया जा सकता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता और गति है। शोधकर्ता लेजर की मदद से 500 नैनोमीटर जितनी सूक्ष्म संरचनाएं बना सकते हैं। प्रोफेसर किन बताते हैं, हमने 400 मिलीमीटर प्रति सेकंड की गति से हाइड्रोजेल संरचना तैयार कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। प्रयोगों के दौरान, टीम ने असली हड्डी के ट्रेबेकुले (आंतरिक जालीदार संरचना) की हूबहू नकल तैयार की। एक पासे के आकार की हड्डी में लगभग 74 किलोमीटर लंबी सूक्ष्म सुरंगें होती हैं; शोधकर्ताओं ने इसी जटिलता को हाइड्रोजेल में उतारने में सफलता पाई है।
शुरुआती प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया कि हड्डी बनाने वाली कोशिकाएं इस हाइड्रोजेल में तेजी से प्रवेश करती हैं और कोलेजन का उत्पादन शुरू कर देती हैं। हालांकि अभी इस तकनीक का परीक्षण जीवित जीवों पर होना बाकी है, लेकिन इसकी क्षमता को देखते हुए मूल सामग्री को पेटेंट करा लिया गया है। भविष्य में यह तकनीक व्यक्तिगत मरीजों की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड इम्प्लांट बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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