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सीबीआई की चार्जशीट में लेफ्टिनेंट कर्नल पर गंभीर आरोप

पचास उड़ानों के लिए पचास लाख रुपये लिये

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्रालय में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी ने एक विदेशी देश को रक्षा उपकरणों के कार्गो शिपमेंट के लिए क्लीयरेंस दिलाने के बदले 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने पर सहमति जताई थी। यह सौदा प्रति उड़ान 1 लाख रुपये की दर से तय हुआ था। अधिकारी दीपक कुमार शर्मा, जून 2023 से रक्षा उत्पादन विभाग  के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निर्यात प्रभाग में उप योजना अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। उन्हें दिसंबर 2025 में उनके दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई के अनुसार, उनके घर की तलाशी के दौरान 3 लाख रुपये की रिश्वत बरामद हुई थी, जिसे उन्होंने स्वेच्छा से एजेंसी को सौंप दिया था।

शर्मा ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित सैन्य हार्डवेयर ले जाने वाली कार्गो उड़ानों के लिए नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो से एनओसी और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से लैंडिंग अनुमति दिलाने का वादा किया था। दुबई स्थित डीपी वर्ल्ड की भारतीय शाखा हिंदुस्तान इंफ्रालॉग को इस रसद परिवहन का ठेका मिला था।

हालांकि चार्जशीट में विदेशी देश का नाम नहीं है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये शिपमेंट आर्मेनिया भेजे जाने थे। सीबीआई ने आरोप लगाया कि शर्मा ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए विदेश मंत्रालय और डीजीसीए के साथ अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया। उन्होंने सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना ही कई ईमेल और अर्ध-सरकारी (DO) पत्र लिखकर उड़ानों को स्क्रीनिंग से छूट देने तक की सिफारिश कर दी थी। एजेंसी ने सबूत के तौर पर अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच की 35 कॉल ट्रांसक्रिप्ट और चैट के अंश अदालत में पेश किए हैं। फिलहाल, दिल्ली की एक अदालत ने 20 फरवरी को शर्मा को जमानत दे दी है क्योंकि जांच पूरी हो चुकी है। इस मामले में मध्यस्थ विनोद कुमार, और डीपी वर्ल्ड के प्रतिनिधि राजीव यादव और रंजीत सिंह को भी सह-आरोपी बनाया गया है।