पनडुब्बी हमले में ईरानी जहाज तबाह
कोलंबोः ईरान और इज़राइल के बीच जारी युद्ध की आग अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गई है। बुधवार को श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी जहाज पर हुए विनाशकारी पनडुब्बी हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के समय जहाज पर कुल 180 कर्मी सवार थे, जिनमें से कम से कम 101 लोग अभी भी लापता हैं। इस भीषण हमले में 78 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 32 की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रभावित जहाज का नाम आईरिस डेना है। हमले की सूचना मिलते ही कोलंबो से नौसेना और वायुसेना के बचाव दलों को तुरंत रवाना किया गया। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजीथा हेराथ ने संसद में इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि 180 यात्रियों के साथ यह जहाज गहरे संकट में फंस गया था।
श्रीलंकाई नौसेना अब तक केवल 32 लोगों को ही सुरक्षित बचाने में सफल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक डॉ. अनिल जासिंघे ने बताया कि बचाए गए लोगों में से एक की स्थिति बहुत गंभीर है और सात अन्य का आपातकालीन विभाग में उपचार चल रहा है।
ईरान के खिलाफ इज़राइल-अमेरिका गठबंधन के युद्ध के पांचवें दिन हुआ यह हमला श्रीलंका के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पिछले कुछ दिनों से तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा संयुक्त हवाई हमले किए जा रहे हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी इज़राइल और उसके पड़ोसी क्षेत्रों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
हालाँकि, हिंद महासागर के इस शांत क्षेत्र में हुए पनडुब्बी हमले ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में गहरा तनाव पैदा कर दिया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह पनडुब्बी किस देश की थी, जिससे यह मामला और भी रहस्यमयी हो गया है। श्रीलंका जैसे शांतिपूर्ण तट पर ऐसा सैन्य हमला दक्षिण एशिया की समुद्री सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है। लापता 101 लोगों की तलाश के लिए श्रीलंकाई नौसेना का सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। विशेषज्ञों को डर है कि हिंद महासागर के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर युद्ध का विस्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।