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बुढ़ापे को पलटने के अनुसंधान से नई जानकारी

चूहों पर हो रहे प्रयोग से हैरान करने वाली खबर

  • प्रोटीन एनडीआरजी 1 का राज खुला

  • यह उम्र पर ब्रेक की तरह होता है

  • बुढ़ापे में बदलाव के खतरे भी हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों में चोट लगने पर उनके ठीक होने की गति धीमी हो जाती है—यह एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिससे कई बुजुर्ग परिचित हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए एक नए अध्ययन में इसके पीछे के एक हैरान करने वाले कारण का खुलासा किया है।

अध्ययन के मुख्य बिंदु साइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, जैसे-जैसे मांसपेशियां बूढ़ी होती हैं, उनकी स्टेम कोशिकाओं में एक विशेष प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। यह प्रोटीन कोशिकाओं को सक्रिय होने और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने में सुस्त बना देता है। हालांकि, यही प्रोटीन इन कोशिकाओं को उम्रदराज मांसपेशियों के तनावपूर्ण वातावरण में लंबे समय तक जीवित रहने में भी मदद करता है।

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संस्थान के डॉ. थॉमस रांडो के अनुसार, यह खोज बुढ़ापे को देखने का एक नया नजरिया देती है। उन्होंने बताया कि जीवित रहने वाली स्टेम कोशिकाएं शायद सबसे कम कार्यक्षम होती हैं। वे इसलिए नहीं बचतीं क्योंकि वे अपने काम में सर्वश्रेष्ठ हैं, बल्कि इसलिए बचती हैं क्योंकि वे जीवित रहने की कला में माहिर हैं।

शोध टीम ने पाया कि एनडीआरजी 1 नामक प्रोटीन युवा चूहों की तुलना में बुजुर्ग चूहों में 3.5 गुना अधिक था। यह प्रोटीन कोशिका के भीतर एक ब्रेक की तरह काम करता है, जो एमटीओआर नामक सिग्नलिंग मार्ग को धीमा कर देता है। सामान्यतः एमटीओआर ही कोशिकाओं को बढ़ने और ऊतकों की मरम्मत के लिए प्रेरित करता है।

जब वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक रूप से बूढ़े हो चुके चूहों (इंसानी उम्र के लगभग 75 वर्ष) में इस प्रोटीन की गतिविधि को रोका, तो उनकी स्टेम कोशिकाएं युवाओं की तरह व्यवहार करने लगीं और चोट को तेजी से ठीक करने लगीं। कायाकल्प की कीमत लेकिन इस कायाकल्प के साथ एक बड़ा जोखिम भी सामने आया।

जैसे ही एनडीआरजी 1 को ब्लॉक किया गया, समय के साथ जीवित रहने वाली स्टेम कोशिकाओं की संख्या कम हो गई। डॉ. रांडो ने इसे मैराथन धावक बनाम स्प्रिंटर के उदाहरण से समझाया। युवा कोशिकाएं तेज धावक की तरह होती हैं जो 100 मीटर की दौड़ तो जीत सकती हैं, लेकिन मैराथन पूरी नहीं कर पातीं। वहीं, बूढ़ी कोशिकाएं मैराथन धावक की तरह होती हैं—प्रतिक्रिया में धीमी, लेकिन लंबे समय तक टिकने वाली।

निष्कर्ष और भविष्य की राह शोधकर्ताओं का मानना है कि बुढ़ापे के दौरान होने वाले कुछ हानिकारक बदलाव असल में उत्तरजीविता रणनीति हो सकते हैं, ताकि स्टेम कोशिकाओं का पूरी तरह सफाया न हो जाए। यह प्रकृति के उस नियम जैसा है जहाँ सूखे या अकाल के समय जानवर प्रजनन के बजाय जीवित रहने पर ऊर्जा खर्च करते हैं। यह खोज भविष्य की एंटी-एजिंग थेरेपी के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोशिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने की एक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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