दोबारा से कीव और आस पास के इलाकों में बिजली गुल
कीव: यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले चार घंटों में हुए रूस के व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमलों ने शहर के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिनेवा में महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय वार्ताएं आयोजित की जा रही हैं, जिसे सैन्य रणनीतिकार यूक्रेन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी कोशिश मान रहे हैं।
यूक्रेनी ऊर्जा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रूसी बलों ने इस बार विशेष रूप से बिजली सब-स्टेशनों और महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनों को निशाना बनाया है। इस हमले के कारण कीव के आधे से अधिक हिस्से में ब्लैकआउट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। चूंकि वर्तमान में वहां का तापमान शून्य से नीचे है, इसलिए बिजली की आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर हीटिंग सिस्टम पर पड़ा है।
आवासीय क्षेत्रों और आवश्यक सेवाओं के लिए हीटिंग का बंद होना मानवीय संकट को और गहरा कर रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों में रूस ने नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइलों का उपयोग किया है, जो अपनी स्टेल्थ क्षमताओं के कारण रडार को आसानी से चकमा देने में सक्षम हैं।
स्थानीय प्रशासन द्वारा गठित मरम्मत टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन हवाई हमलों के सायरन और नए हमलों के निरंतर खतरे के कारण उनका काम बार-बार बाधित हो रहा है। यह हमला न केवल बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए है, बल्कि यूक्रेन के नागरिकों के मनोबल को तोड़ने के लिए भी किया गया है।
राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान करते हुए तत्काल अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि इन हमलों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में यूक्रेन का ऊर्जा बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।
जबकि फ्रंटलाइन पर रूस और यूक्रेन के बीच भीषण संघर्ष जारी है, कीव पर यह हमला यह दर्शाता है कि रूस अब युद्ध को केवल सीमा तक सीमित न रखकर उसे नागरिक जीवन और संसाधनों तक विस्तारित कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस घटना को युद्ध अपराध और अमानवीय रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।