Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच संपन्न हुआ मत... दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की भी होगी सरकारी खरीद, सिकुड़े और टूटे दानो... Guna Crime: गुना में पिता के दोस्त की शर्मनाक करतूत, मासूमों से अश्लील हरकत कर बनाया वीडियो; पुलिस न... Allahabad High Court: मदरसों की जांच पर NHRC की कार्यशैली से 'स्तब्ध' हुआ हाई कोर्ट; मॉब लिंचिंग का ... PM Modi in Hardoi: 'गंगा एक्सप्रेसवे यूपी की नई लाइफलाइन', हरदोई में बरसे पीएम मोदी— बोले, सपा-कांग्... Jabalpur Crime: 'शादी डॉट कॉम' पर जिसे समझा जीवनसाथी, वो निकला शातिर ब्लैकमेलर; फर्जी DSP बनकर 5 साल... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में बकरी चोरी के आरोप में युवक को खंभे से बांधकर पीटा, रिटायर्ड कृषि अ... Vande Bharat Extension: जम्मू से श्रीनगर का सफर अब और आसान, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल को द... West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच 'दीदी' या 'दा... Unnao Road Accident: उन्नाव में भीषण सड़क हादसा, मुंडन संस्कार से लौट रही बोलेरो और डंपर की टक्कर मे...

MP Assembly News: मध्य प्रदेश के 22 जिलों में सिर्फ 4 शव वाहन, विधानसभा में गूंजा स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा

भोपाल: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के राजमार्ग गांव में किसी परिवार में अगर मौत हो जाए तो परिजन विलाप से पहले इस इंतजाम में जुटते हैं कि अंतिम संस्कार होगा कहां और कैसे शव को श्मशान तक ले जाया जा सकेगा. आदिवासी जिले मंडला के बमहनी बंजर में जब कोई इंतजाम नहीं हुआ तो दान में मिली वैन को जुगाड़ से शव वाहन में बदल लिया गया. विधानसभा में सरकार ने मंजूर किया है कि पूरे प्रदेश में ब्लाॉक स्तर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अलग से कहीं भी शव वाहन का इंतजाम नहीं है.

जबकि कायदा ये कहता है कि एक से डेढ़ लाख की आबादी पर एक शव वाहन होना चाहिए, लेकिन सरकार की विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक बुरहानपुर जैसे जिले में 7 लाख की आबादी पर केवल 2 शव वाहन है. जबकि राजधानी भोपाल जहां 27 लाख से ज्यादा आबादी है, वहां 6 लाख से ज्यादा आबादी के लिए केवल एक शव वाहन उपलब्ध है.

यहां अंतिम यात्रा में ट्रैक्टर ही सहारा

बीते दिनों सुर्खियों में आए नरसिंहपुर के राजमार्ग गांव की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब सहानुभूति बटोरती रही. तस्वीर जिसमें कड़ी धूप में शव को टैक्ट्रर में डालकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. राजस्व में दर्ज नहीं हो सकी राजमार्ग गांव में करीब 1200 की बसाहट है. श्मशान घाट नहीं और शव वाहन भी उपलब्ध नहीं. अंतिम संस्कार के लिए ये सीमा से सटे गांव लोलरी जाते हैं. ये केवल राजमार्ग नहीं आस-पास के गांव लोलरी देवरी पलोहा कटंगी यहां कहीं भी शव वाहन की उपलब्धता नहीं है.

लोलरी गांव पंचायत सचिव उमा श्रीवास्तव बताती हैं ऐसे कोई दिक्कत नहीं है. वैसे तो गांव में भी अब लोग दुखी बीमारी में जुट जाते हैं और कंधे पर ही श्मशान तक ले जाते हैं, लेकिन अगर दूरी हो तो एक दूसरे को टैक्ट्रर ट्राली देने में भी पीछे नहीं हटते. बुनियादी जरूरत के इंतजाम के लिए वाकई ये गांव सरकार की तरफ नहीं देखते.”

जुगाड़ की वैन से शव पहुंचते हैं श्मशान

मंडला के बम्हनी बंजर में कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर के भी यही हालात हैं. यहां तो आदिवासियों की बड़ी आबादी है. तो गांव वालों ने खुद ही रास्ता निकाला. यहां से कांग्रेस से विधायक रहे संजीव उइके ने कभी अपने पिता की स्मृति में वैन एंबुलेंस हेल्थ सेंटर को दान में दी थी. अब उसी वैन का इस्तेमाल गांव वाले शव वाहन के रूप में भी कर लेते हैं.