उत्तर पूर्व से तीखी प्रतिक्रिया आते ही सतर्क हुई सरकार
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली पुलिस ने हाल ही में दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में तीन महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार और आपराधिक धमकी देने के मामले में एक दंपत्ति को गिरफ्तार किया है। यह घटना 20 फरवरी, 2026 की है, जब अपने किराये के घर में बिजली का काम करवाते समय हुए मामूली विवाद ने एक गंभीर मोड़ ले लिया।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जब महिलाएं (जो अरुणाचल प्रदेश से हैं) अपने फ्लैट में एसी लगवाने का काम करवा रही थीं, तो ड्रिलिंग के कारण नीचे वाले फ्लैट में धूल गिर गई। इसी बात को लेकर पड़ोसी दंपत्ति, रूबी जैन और उनके पति हर्ष, ऊपर आए और बहस शुरू हो गई। शिकायत में महिलाओं ने आरोप लगाया कि दंपत्ति ने उनकी जातीयता को निशाना बनाते हुए नस्लीय टिप्पणियाँ कीं, अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें धमकियाँ दीं।
पुलिस ने आरोपी दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया है। मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 196 (धर्म, नस्ल या जन्म स्थान के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमीकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी जोड़ दी हैं। अब इस मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त रैंक के अधिकारी द्वारा की जा रही है।
यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर के नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की है और उन्हें पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ दिल्ली और अन्य महानगरों में भेदभाव की समस्या एक लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हालांकि इन घटनाओं का कोई एक एकीकृत सरकारी डेटाबेस उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न अध्ययनों और मानवाधिकार अध्ययन: नार्थ ईस्ट सपोर्ट सेंटर एंड हेल्पलाइन द्वारा किए गए शोध में यह दावा किया गया है कि दिल्ली में रह रहे पूर्वोत्तर के लगभग 86% लोगों ने किसी न किसी रूप में भेदभाव का अनुभव किया है। पूर्वोत्तर के लोगों, विशेषकर महिलाओं को अक्सर नस्लीय टिप्पणियों, कार्यस्थल पर भेदभाव और आवास मिलने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अध्ययनों ने भारत में विभिन्न नस्लों या समुदायों के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में मौजूद पूर्वाग्रहों की ओर संकेत किया है।