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Noida Violence: NIT इंजीनियर से कैसे ‘मास्टरमाइंड’ बना आदित्य आनंद? रिपोर्टर के भेष में रची नोएडा हिंसा की साजिश

Noida Riots Latest News: 13 अप्रैल को नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा अब एक सुनियोजित और संगठित साजिश के रूप में सामने आ रही है. शुरुआत में जिस घटना को मजदूरों का स्वतः स्फूर्त गुस्सा माना जा रहा था, एसटीएफ (STF) की जांच में उसकी परतें खुलनी शुरू हो गई हैं. इस पूरी साजिश का केंद्रबिंदु और मास्टरमाइंड आदित्य आनंद को बताया जा रहा है, जिसने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सुरक्षित नौकरी छोड़कर मजदूरों के बीच एक हिंसक नेटवर्क तैयार किया.

आदित्य आनंद मूल रूप से बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है. उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी प्रभावशाली रही है. उसने जमशेदपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान वह एक होनहार छात्र था और तकनीकी क्षेत्र में उसका भविष्य उज्जवल माना जा रहा था. इंजीनियरिंग के बाद उसने नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करियर शुरू किया और बाद में गुरुग्राम में भी आईटी सेक्टर में कार्यरत रहा. हालांकि, धीरे-धीरे उसका रुझान सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों की ओर बढ़ा और उसने अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़ दी.

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से रिपोर्टर बनने का मिशन

जांच एजेंसियों के मुताबिक, नौकरी छोड़ने के बाद आदित्य आनंद एक ऐसे संगठन से जुड़ा जो मैगजीन और यूट्यूब चैनल संचालित करता था. इसी प्लेटफॉर्म के जरिए उसने खुद को रिपोर्टर के रूप में पेश करना शुरू किया. यह उसकी रणनीति का एक हिस्सा था, ताकि वह मजदूरों के बीच आसानी से पहुंच सके और उनका भरोसा जीत सके. मजदूरों के मुद्दों को कवर करने के बहाने वह उनके बीच सक्रिय हुआ और मजदूर बिगुल जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की. वह मजदूरों की गुप्त बैठकों में शामिल होता, उन्हें संगठित करता और भाषण देकर उन्हें एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार करता था.

आदित्य के फ्लैट पर बनी थी हिंसा की रणनीति

STF की जांच में सबसे चौंकाने वाला राज यह खुला है कि नोएडा के सेक्टर- 37 स्थित अरुण विहार में, जहां आदित्य किराए पर रहता था, वहां 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं. इन बैठकों में ‘मजदूर बिगुल’, ‘दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन’, ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘एकता संघर्ष समिति’ जैसे संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे. 9 से 10 अप्रैल के बीच आदित्य नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में पूरी तरह सक्रिय हो गया और मजदूरों को आंदोलन के लिए भड़काना शुरू कर दिया. हिंसा वाले दिन वह खुद भीड़ के बीच भाषण देते हुए देखा गया था, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है.

1 लाख का इनामी, तमिलनाडु से हुई गिरफ्तारी

हिंसा के बाद आदित्य आनंद फरार हो गया था. पुलिस से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा. नोएडा से दिल्ली और फिर रेलवे नेटवर्क के जरिए वह तमिलनाडु तक जा पहुंचा. नोएडा एसटीएफ यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र के नेतृत्व में पुलिस ने मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. अंततः 1 लाख रुपये के इस इनामी आरोपी को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया.

STF अब आदित्य से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से चेहरे शामिल थे और इसके लिए फंडिंग कहां से हो रही थी. आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.