‘मुस्लिम IAS-IPS को हिंदू इलाकों में नहीं मिलता किराए का घर’: पूर्व आईएएस नियाज खान का बड़ा आरोप, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
भोपाल: मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी और अपनी चर्चित किताबों के लिए जाने जाने वाले नियाज खान एक बार फिर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं।
हमेशा अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले पूर्व नौकरशाह ने इस बार मुस्लिम अधिकारियों के साथ होने वाले कथित सामाजिक भेदभाव और समाज में बढ़ती दूरियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
🏠 ‘मुस्लिम IAS-IPS को भी हिंदू इलाकों में नहीं मिलता किराए का मकान’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए विचारों का ब्योरा:
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किराए के मकान पर आरोप: नियाज खान ने लिखा कि समाज में दूरियां इस कदर बढ़ चुकी हैं कि एक मुस्लिम आईएएस या आईपीएस अधिकारी को भी हिंदू बहुल इलाकों में किराए का घर ढूंढने में मुश्किल होती है और लोग मकान देने से हिचकिचाते हैं।
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व्यक्तिगत अनुभव का दावा: पूर्व आईएएस ने अपना दर्द साझा करते हुए दावा किया कि उन्होंने खुद अपनी प्रशासनिक सेवा के दौरान इस तरह के भेदभाव का सामना किया है।
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देशभक्ति पर सवाल: उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए लिखा, “क्या हिंदू हर मुसलमान को आतंकी समझते हैं? जबकि सच्चाई यह है कि हर सच्चा मुसलमान पूरी तरह देशभक्त है।”
👕 पहनावा बदलने और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर दी थी अजीब सलाह
नियाज खान के पिछले विवादित बयानों की पृष्ठभूमि:
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पहनावे पर बयान: इससे पहले मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने मुस्लिम समुदाय को अपनी पारंपरिक वेशभूषा बदलने की सलाह दी थी।
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तुर्की स्टाइल अपनाने का तर्क: उनका कहना था कि पहचान के कारण होने वाले हमलों से बचने और सुरक्षित रहने के लिए मुस्लिम युवाओं को कुर्ता-पायजामा और टोपी के बजाय तुर्की स्टाइल के आधुनिक कपड़े पहनने चाहिए।
📖 ‘ब्राह्मण द ग्रेट’ किताब, शाकाहार और सनातन के समर्थन में भी रख चुके हैं विचार
अन्य विषयों पर पूर्व नौकरशाह के चर्चित रुख:
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ब्राह्मण समाज का समर्थन: ‘ब्राह्मण द ग्रेट’ पुस्तक के लेखक नियाज खान सनातन धर्म और ब्राह्मण समाज के पक्ष में भी खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। उनका मानना था कि ब्राह्मण हजारों वर्षों से सनातन संस्कृति के संरक्षक रहे हैं, इसलिए उन्हें आबादी के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
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शाकाहार और सौहार्द की अपील: वे पूर्व में भी मुस्लिम समुदाय को शाकाहारी जीवनशैली अपनाने, गौ-सेवा से जुड़ने, अवैध धर्मांतरण का विरोध करने और समाज के सभी वर्गों के साथ मधुर संबंध बनाए रखने के सुझाव दे चुके हैं।