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जेलों में बंद राजनीतिक बंदियों का अनशन

मादुरो की बेदखली के बाद भी नहीं हुआ बदलाव

कराकासः वेनेजुएला की जेलों में बंद 200 से अधिक राजनीतिक बंदियों ने अपनी रिहाई और जेल की अमानवीय स्थितियों के विरोध में सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। मानवाधिकार संगठनों और बंदियों के परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह कदम देश की सत्तावादी सरकार पर दबाव बनाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।

वेनेजुएला के प्रमुख मानवाधिकार संगठन फोरो पेनल के अनुसार, इन कैदियों में विपक्ष के कार्यकर्ता, छात्र और पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने या असहमति जताने के आरोप में जेल में डाला गया है। प्रदर्शनकारी कैदियों की मुख्य मांगों में उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई, जेलों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही अत्यधिक देरी को समाप्त करना शामिल है।

जेल की भयावह स्थिति परिजनों का आरोप है कि जेलों के भीतर बंदियों को अत्यधिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। कई कैदियों को पर्याप्त भोजन, साफ पानी और रोशनी से वंचित रखा जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं, क्योंकि उनमें से कई पहले से ही कुपोषण और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वेनेजुएला की न्यायिक प्रणाली का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के हथियार के रूप में किया जा रहा है, जहाँ बिना किसी ठोस सबूत के लोगों को वर्षों तक सलाखों के पीछे रखा जाता है।

वेनेजुएला में जारी इस संकट ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने पहले भी वेनेजुएला सरकार से राजनीतिक कैदियों को छोड़ने और मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूख हड़ताल मादुरो सरकार की अंतरराष्ट्रीय छवि को और अधिक नुकसान पहुँचा सकती है, खासकर ऐसे समय में जब देश पहले से ही आर्थिक संकट और कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। विपक्षी नेताओं ने इस आंदोलन को साहस का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह भूख हड़ताल वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलहाल, वेनेजुएला सरकार की ओर से इस भूख हड़ताल पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।