महिलाओं के बाद अब युवाओं को साधने की नई चाल
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बेरोजगार युवाओँ के लिए डेढ़ हजार
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बजट में पांच हजार करोड़ आवंटित
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पूरे राज्य में लंबी लंबी कतारें लगी
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लक्ष्मी भंडार की सफलता के बाद अब राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए युवा साथी योजना का दायरा बढ़ाकर एक बड़ा दांव खेला है। विधानसभा चुनावों से पहले, तृणमूल कांग्रेस सरकार इस योजना के जरिए बहनों के बाद अब भाइयों का साथ भी सुनिश्चित करना चाहती है। राज्य के कोने-कोने से—चाहे वह हुगली का श्रीरामपुर हो, मुर्शिदाबाद का बरहमपुर या दक्षिण 24 परगना का काकद्वीप—हर जगह सरकारी शिविरों में युवाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
यह योजना मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के उन बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए है जो आर्थिक तंगी के कारण संघर्ष कर रहे हैं। इस योजना की प्रमुख शर्तें और लाभ निम्नलिखित हैं। दसवीं पास और 21 से चालीस साल के बेरोजगार युवा इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत लाभार्थियों को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाएगी। यह भत्ता अधिकतम 5 साल तक या नौकरी मिलने तक (जो भी पहले हो) जारी रहेगा।
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी, लेकिन पंजीकरण की प्रक्रिया फरवरी से ही शुरू कर दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि जो छात्राएं कन्याश्री-३ या अन्य शैक्षणिक छात्रवृत्ति (जैसे स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप) प्राप्त कर रही हैं, वे भी युवसाथी के लिए आवेदन कर सकती हैं। हालांकि, जो महिलाएं पहले से लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ ले रही हैं, उन्हें इस भत्ते के दायरे से बाहर रखा गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी ने 2021 के चुनाव में लक्ष्मी भंडार के वादे से महिला वोटों को अपनी ओर मोड़ा था। अब 2026 की कठिन चुनौती को देखते हुए, वे पुरुष मतदाताओं और युवाओं (विशेषकर पहली बार मतदान करने वाले) को इस भत्ते के जरिए जोड़ना चाहती हैं। विपक्षी दल इसे राज्य में रोजगार की दयनीय स्थिति का प्रमाण बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इन लंबी लाइनों को बूथों पर लगने वाली लाइनों के पूर्व संकेत के रूप में देख रहा है।
शिविरों में उमड़ रही अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने ऑनलाइन पोर्टल भी समय से पहले खोल दिया है। आवेदन के लिए माध्यमिक की मार्कशीट, आधार कार्ड, बैंक विवरण और जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता है। पहले इस योजना को अगस्त से लागू होना था, लेकिन चुनावी समीकरणों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे फरवरी से ही शुरू करने का निर्णय लिया ताकि अप्रैल तक पैसा खातों में पहुँचना शुरू हो जाए।