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तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि हुए शामिल

  • बंग भवन में नहीं हुआ यह समारोह

  • नये सांसदों का सुबह शपथग्रहण हुआ

  • जमात के साथ कई स्पष्ट मतभेद कायम

ढाकाः मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय दर्ज हुआ, जब खालिदा जिया के पुत्र और मुख्य विपक्षी दल के नेता तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 60 वर्षीय तारिक रहमान ने हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में अपनी पार्टी का सफल नेतृत्व करते हुए प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की है। इस जीत को बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

परंपरा से हटकर भव्य समारोह राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक रहमान को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस बार शपथ ग्रहण समारोह में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए, समारोह का आयोजन आधिकारिक राष्ट्रपति भवन बंगभवन के बजाय जातीय संसद के साउथ प्लाजा में किया गया। इस खुले और सार्वजनिक स्थान पर शपथ ग्रहण को लोकतंत्र की नई शुरुआत और जनता के करीब होने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले मंगलवार सुबह मुख्य चुनाव आयुक्त ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने बांग्लादेश की संसद के नवनिर्वाचित सदस्यों को पद की शपथ दिलाई। संसद का यह नया स्वरूप देश की भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संवैधानिक सुधार और राजनीतिक गतिरोध शपथ ग्रहण के साथ ही नई सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती संविधान सुधार आयोग के रूप में खड़ी है। 12 फरवरी 2026 को हुए जनमत संग्रह में बहुमत से ‘हाँ’ वोट मिलने के बाद, अब पूरी संसद को अगले 180 दिनों तक एक सुधार आयोग के रूप में कार्य करना है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आ रहे हैं। जहाँ ‘जमात-ए-इस्लामी‘ जैसे दलों ने इस प्रक्रिया का समर्थन किया है, वहीं तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने संविधान सुधार आयोग के सदस्य के रूप में दूसरी बार शपथ लेने से इनकार कर दिया है। बीएनपी का तर्क है कि परिषद का कोई भी प्रावधान अभी तक आधिकारिक रूप से संविधान में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए इस तरह की शपथ का कोई संवैधानिक आधार नहीं है।

भविष्य की अनिश्चितता संवैधानिक सुधारों की इस जटिल प्रक्रिया और सांसदों के दोहरे दायित्वों (संसद और सुधार आयोग) को लेकर देश में बेचैनी का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के लिए शासन चलाना और संवैधानिक बदलावों के बीच संतुलन बिठाना एक कठिन परीक्षा होगी। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया नेतृत्व बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित कर पाएगा।