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MP News: मध्य प्रदेश का ‘अजब’ दिव्यांग ब्रिज! छोटी-बड़ी भुजाओं वाला अनोखा निर्माण, अफसर हाईवे की एंट्री देना ही भूले

इंदौर: भोपाल का 90 डिग्री ब्रिज देशभर में चर्चा का विषय बना था. वहीं अब 90 डिग्री ब्रिज के बाद इंदौर का एक ब्रिज सुर्खियों में है, लोग इसे दिव्यांग ब्रिज का नाम दे रहे हैं. ऐसा इसलिए कि इसे बनाने वाले पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ब्रिज के पास से गुजरने वाले मास्टर प्लान की सड़क को बनाना भूल गए. नतीजन ब्रिज की एक भुजा बड़ी है, जबकि दूसरी छोटी है. इसके बनने से पहले ही उसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

सुर्खियों में इंदौर का ब्रिज

मध्य प्रदेश में निर्माण कार्य में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है. सबसे पहले भोपाल का 90 डिग्री ब्रिज देशभर में हंसी का पात्र बना था. इसके बाद भोपाल में ही करोंद विनायक वैली कॉलोनी में बीच सड़क पर हाईटेंशन टॉवर बनाकर उसके नीचे से सड़क निकाल दी. जिसके नीचे लोग गुजरते हैं. इस सड़क को एफिल टावर वाली सड़क नाम दिया गया. अब इसका ताजा उदाहरण इंदौर के देवास नाके पर बना रहे मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का फ्लाईओवर है.

ब्रिज की एक भुजा लंबी, एक छोटी

तकरीबन 890 मी लंबे ओवर ब्रिज को बनाने के लिए 2 साल पहले अप्रैल 2024 में काम शुरू हुआ था. जिसे अप्रैल 2026 में पूरा करने की डेडलाइन तय हुई थी, लेकिन मौके पर जब ब्रिज के 10 पिलर खड़े किए गए तो पता चला ब्रिज के एक छोर को मास्टर प्लान की सड़क के सामने ही उतार दिया गया है. इतना ही नहीं इस ओवर ब्रिज की एक भुजा 450 मीटर है, जबकि दूसरी भुजा मात्र 150 मीटर है.

ब्रिज की भुजा को और छोटा करने का फैसला

ईटीवी भारत ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के इस पूरे ब्रिज की डिजाइन तत्कालीन कार्यपालन यंत्री गिरजेश शर्मा के निर्देशन में और उनके द्वारा ही डिजाइन फाइनल करने के बाद हुआ. जब उन्हें मास्टर प्लान की सड़क का ध्यान दिलाया गया, तो आनन फानन में अधिकारियों ने छोटी भुजा को और छोटा करने का फैसला ले लिया, ऐसा इसलिए क्योंकि इस भुजा को mr11 रोड के ठीक पहले हर हाल में तकरीबन 70 मीटर दूर खत्म करना है, ऐसी स्थिति में भी ब्रिज से गुजरने वाली गाड़ियों का आमना-सामना सीधे तौर पर इंदौर से उज्जैन की ओर जाने वाली एमआर 11 रोड की ओर से आने वाले वाहनों से होगा, जिससे दुर्घटना होने की संभावना है.

वाहनों के टर्न होने के लिए नहीं छोड़ी जगह

इंदौर में कंस्ट्रक्शन प्लानर और वरिष्ठ इंजीनियर अतुल सेठ बताते हैं कि “इस ओवरब्रिज को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यही है कि इसे रोड के सामने उतार दिया गया है. इसके अलावा बड़े वाहनों को मुड़ने के लिए इतनी भी जगह नहीं छोड़ी गई है कि वह आसानी से यू टर्न ले सके. ऐसी स्थिति में अभी निर्माण के दौरान ही ब्रिज की एक भुजा को लंबी करके उसमें एमआर 11 रोड के लिए अंडर पास दे दिया जाए, तो प्लानिंग आखरी समय में भी सुधारी जा सकती है.

दुर्घटनाओं की वजह मानना जल्दबाजी

इस पर निर्णय करना जनप्रतिनिधियों का काम है, लेकिन यह तय है कि अभी जिस तरह का ब्रिज बना है, वह भविष्य में दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकता है.” जबकि इस मामले में एमपीआरडीसी के संबंधित कार्यपालन यंत्री गिरजेश शर्मा का कहना है कि “आखरी समय में संबंधित रोड के कारण देवास की ओर ब्रिज की भुजा थोड़ी कम करनी पड़ी है. 4 से 6 मीटर का फर्क आएगा, लेकिन इसे अभी से दुर्घटनाओं की वजह मानना जल्दबाजी होगी.