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राष्ट्रपति जापारोव ने मंत्रियों को किया बर्खास्त

किर्गिस्तान में चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक उथलपुथल तेज

विश्केकः किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्र जापारोव ने सोमवार को उन तीन मंत्रियों को पद से हटा दिया, जिन्हें उनके सुरक्षा विभाग के बर्खास्त किए गए पूर्व प्रमुख का करीबी माना जाता था। जापारोव आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक मैदान साफ करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

मध्य एशिया के अत्यधिक सत्तावादी क्षेत्र में कभी लोकतंत्र और खुलेपन की उम्मीद माने जाने वाले किर्गिस्तान में सोवियत संघ के पतन के बाद पिछले तीन दशकों में तीन क्रांतियां और भारी राजनीतिक अस्थिरता देखी गई है। 2020 के नवीनतम विद्रोह के बाद सत्ता में आए जापारोव ने विरोधियों को हाशिए पर धकेलते हुए अपनी शक्ति को मजबूत किया है। वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें उन्हें जीत का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

राष्ट्रपति प्रशासन के एक बयान के अनुसार, सोमवार को उन्होंने अपने परिवहन, पर्यावरण और आपातकालीन स्थिति मंत्रियों को हटा दिया, जो सभी कभी उनके सहयोगी रहे थे। यह कदम पिछले सप्ताह उनके पूर्व जासूसी प्रमुख कमचीबेक ताशिएव को अचानक हटाने के बाद उठाया गया है। जापारोव और ताशिएव ने अब तक मुख्य रूप से एक पावर टैंडम (जुगलबंदी) के रूप में देश पर शासन किया था।

सरकारी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में जापारोव ने कहा कि वह इस पारंपरिक रूप से अशांत पूर्व-सोवियत देश में तख्तापलट की संभावनाओं को विफल करने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ताशिएव के करीबी कई अधिकारी किर्गिस्तान को सही रास्ते से भटकाने और प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक व भौगोलिक गुटों के बीच कलह पैदा करने की साजिश रच रहे थे।

उत्तर से आने वाले जापारोव और दक्षिण से ताशिएव एक जोड़ी के रूप में शासन करते थे—जो किर्गिस्तान के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच नाजुक संतुलन को बनाए रखने का एक अनौपचारिक समाधान था। विशाल पर्वतों से अलग हुए इन दोनों क्षेत्रों की अपनी मजबूत स्थानीय पहचान है। मानवाधिकार समूहों ने जापारोव पर उनके लगभग छह साल के शासनकाल में सत्तावादी प्रवृत्तियों का आरोप लगाया है, क्योंकि वे खुद को स्थिरता लाने वाले नेता के रूप में पेश करते हुए नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।