ऑस्ट्रेलिया से आये थे आईएसआईएल के लड़कों के रिश्तेदार
दमिश्कः सीरिया में कुर्द अधिकारियों ने आईएसआईएल आतंकवादियों के 34 ऑस्ट्रेलियाई रिश्तेदारों को उत्तरी सीरिया के एक शिविर से रिहा कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें दमिश्क के रास्ते ऑस्ट्रेलिया भेजा जाएगा। रोज कैंप की एक निदेशक ने सोमवार को जानकारी दी कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को उनके परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया है, जो उनकी रिहाई के लिए सीरिया आए थे।
निदेशक हक्मीह इब्राहिम ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया, आज हम ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीयता वाले 11 परिवारों को उनके रिश्तेदारों को सौंप रहे हैं। ये परिवार रोज कैंप में रहने वाले आखिरी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। इब्राहिम ने खुलासा किया कि इस शिविर में अभी भी लगभग 50 देशों के 2,201 लोग रह रहे हैं। रिहा किए गए लोगों को देश छोड़ने से पहले छोटी बसों के जरिए दमिश्क भेजा गया, जिसकी सुरक्षा के लिए एक सैन्य वाहन साथ चल रहा था।
2019 में जब आईएसआईएल को सीरिया में उसके अंतिम क्षेत्रीय गढ़ से खदेड़ दिया गया था, तब से हजारों संदिग्ध लोगों को रोज और अल-होल जैसे शिविरों में रखा गया है। पिछले महीने कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस के साथ लड़ाई के दौरान सीरियाई सरकारी बलों ने अल-होल पर नियंत्रण कर लिया था।
ऑस्ट्रेलियाई लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता इस मामले पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक बयान में स्पष्ट किया कि वह सीरिया से लोगों को वापस लाने का खर्च या जिम्मेदारी नहीं उठाएगी। सरकार ने कहा, हमारी सुरक्षा एजेंसियां सीरिया की स्थिति पर नजर रख रही हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे ऑस्ट्रेलिया लौटने के इच्छुक किसी भी नागरिक के लिए तैयार हैं।
बयान में आगे चेतावनी दी गई, इस समूह के लोगों को यह पता होना चाहिए कि यदि उन्होंने कोई अपराध किया है और वे ऑस्ट्रेलिया लौटते हैं, तो उन्हें कानून की पूरी ताकत का सामना करना होगा। ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
जनवरी में ब्रिटिश एनजीओ सेव द चिल्ड्रन ने चेतावनी दी थी कि पूर्वोत्तर सीरिया के शिविरों में रहने वाले 20,000 बच्चों को सशस्त्र समूहों द्वारा शोषण या नुकसान का खतरा है। ब्रिटेन सहित दुनिया भर की सरकारें अपने नागरिकों को वापस लाने में धीमी रही हैं। रोज कैंप की सबसे चर्चित निवासी ब्रिटेन में जन्मी शमीमा बेगम है, जो 2015 में लंदन से भागकर आईएसआईएल में शामिल हुई थी। ब्रिटेन ने उसकी नागरिकता रद्द कर दी है और वह अब भी इसी शिविर में है।