पड़ोसी अजरबैजान का विवाद सुलझाने की दिशा में नई पहल
येरेवन: वैश्विक कूटनीति के मानचित्र पर कल शाम एक ऐतिहासिक क्षण अंकित हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंचे। किसी भी पदस्थ अमेरिकी उपराष्ट्रपति द्वारा अर्मेनिया की यह पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसने न केवल यूरेशियाई राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि वाशिंगटन के रणनीतिक झुकाव का एक स्पष्ट संदेश भी दिया है।
हवाई अड्डे पर अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत ने इस यात्रा की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया। कूटनीतिक गलियारों में इस यात्रा को अर्मेनिया के रूसी प्रभाव से मुक्त होकर पश्चिमी खेमे में शामिल होने की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
वेंस का यह दौरा दक्षिण काकेशस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करने का एक प्रयास है। इस यात्रा का प्राथमिक एजेंडा अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच दशकों से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाना है। वेंस की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में केवल एक मध्यस्थ नहीं, बल्कि एक गारंटर की भूमिका निभाना चाहता है। अपने संबोधन में वेंस ने स्पष्ट किया, अमेरिका अर्मेनिया की क्षेत्रीय अखंडता और लोकतंत्र का अडिग समर्थक है। हम यहाँ केवल बातचीत के लिए नहीं, बल्कि एक स्थायी शांति संधि की नींव रखने आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की इस सक्रियता के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। कैस्पियन सागर से यूरोप तक जाने वाले तेल और गैस पाइपलाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। यूक्रेन युद्ध के बाद काकेशस में रूस की पकड़ कमजोर हुई है, जिसे अमेरिका भुनाना चाहता है। अर्मेनिया की सीमा ईरान से लगती है, जिससे यह क्षेत्र अमेरिकी खुफिया और रणनीतिक निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस यात्रा के दौरान अमेरिका द्वारा अर्मेनिया के लिए विशेष सुरक्षा सहायता और आर्थिक विकास पैकेजों की घोषणा की संभावना है। इसमें सैन्य आधुनिकीकरण और साइबर सुरक्षा में सहयोग शामिल हो सकता है। निश्चित रूप से, इन कदमों से मास्को और बाकू (अजरबैजान) में असहजता बढ़ेगी, जिससे आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ने के आसार हैं।