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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों से निपटने का नया कानून

यूरोपीय संघ एआई अधिनियम 2026 लागू किया

ब्रसेल्सः आज सुबह ब्रसेल्स से निकली खबरों ने वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में हलचल मचा दी है। यूरोपीय आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विनियमित करने के लिए दुनिया का सबसे व्यापक और सख्त कानूनी ढांचा पेश किया है। ई यू ए आई एक्ट 2026 के नाम से चर्चित यह कानून तकनीक के अनियंत्रित विकास और मानवीय मूल्यों के बीच एक संतुलन बनाने का साहसिक प्रयास है।

इस अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘रिस्क-बेस्ड अप्रोच’ है। यूरोपीय आयोग ने एआई प्रणालियों को उनके जोखिम के स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया है। सामाजिक स्कोरिंग और बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करने वाली प्रणालियों पर पूर्ण प्रतिबंध। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में उपयोग होने वाली एआई प्रणालियों को सख्त पारदर्शिता और डेटा गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर रीयल-टाइम फेशियल रिकग्निशन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम है, जिसे केवल आतंकी खतरे या गंभीर अपराधों जैसी असाधारण राष्ट्रीय सुरक्षा स्थितियों में ही छूट दी जा सकती है।

बढ़ते जनरेटिव एआई के दौर में, यह कानून पारदर्शिता को अनिवार्य बनाता है। अब एआई कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किए गए डेटा के स्रोतों का खुलासा करें। विशेष रूप से कॉपीराइट सामग्री के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

इसके अतिरिक्त, डीपफेक के विरुद्ध एक मजबूत रक्षा तंत्र तैयार किया गया है। एआई द्वारा निर्मित किसी भी सिंथेटिक कंटेंट (वीडियो, फोटो या ऑडियो) पर स्पष्ट डिजिटल वॉटरमार्क होना अनिवार्य है, ताकि जनमत को प्रभावित करने वाले दुष्प्रचार पर रोक लगाई जा सके।

नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के लिए परिणाम अत्यंत गंभीर होंगे। यूरोपीय संघ ने उनके वैश्विक वार्षिक टर्नओवर का 7 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है, जो सिलिकॉन वैली की बड़ी टेक कंपनियों के लिए अरबों डॉलर का वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

जहाँ एक ओर टेक दिग्गजों ने चिंता जताई है कि ये नियम नवाचार की गति को धीमा कर सकते हैं, वहीं मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसे डिजिटल युग में लोकतंत्र की जीत करार दिया है। यह कानून केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा; यह भारत, अमेरिका और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ के रूप में कार्य करेगा, जो अपने स्वयं के एआई नियमों को अंतिम रूप दे रहे हैं।