युद्ध के बाद तनाव के बीच परमाणु कूटनीति की वापसी
मस्कट: वैश्विक राजनीति के मंच पर एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने की मेज पर बैठने की पुष्टि की है। वर्षों के अविश्वास और हालिया सैन्य तनाव के बीच, संयुक्त व्यापक कार्य योजना या परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने का यह संभवतः अंतिम और सबसे गंभीर प्रयास माना जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में शांतिदूत की भूमिका निभाने वाला ओमान एक बार फिर इन दो कट्टर विरोधियों को करीब लाने में सफल रहा है। पिछले कई महीनों से पर्दे के पीछे चल रही बैक-चैनल कूटनीति के बाद यह औपचारिक बैठक आयोजित की जा रही है। इस वार्ता में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि मुख्य पर्यवेक्षक और सूत्रधार के रूप में उपस्थित रहेंगे, जो तकनीकी बारीकियों को सुलझाने में मदद करेंगे।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे वार्ता की मेज पर केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। तेहरान की प्राथमिक मांग उन कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना है जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है। ईरान एक ऐसा सत्यापन योग्य रोडमैप चाहता है जो यह सुनिश्चित करे कि समझौता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियां बिना किसी डर के ईरान के साथ व्यापार और बैंकिंग लेनदेन कर सकेंगी।
दूसरी ओर, व्हाइट हाउस और विदेश विभाग के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अमेरिकी प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर इतनी सख्त निगरानी और सीमाएं हों कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी है कि वे धैर्यपूर्ण लेकिन सख्त रुख अपनाएंगे और ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों पर भी नजर रखेंगे।
यह वार्ता एक ऐसे समय में हो रही है जब अरब सागर में हालिया ईरानी ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना ने पहले ही कड़वाहट पैदा कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सैन्य टकराव कूटनीतिक मेज पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन ये पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार भी सकते हैं।
इस वार्ता के सफल होने के दो बड़े वैश्विक प्रभाव होंगे। यदि समझौता होता है, तो ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटेंगे, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें स्थिर हो सकती हैं। मिडिल ईस्ट में एक बड़े युद्ध का खतरा काफी हद तक टल सकता है।
आने वाला शुक्रवार न केवल ईरान और अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक हो सकता है। यदि मस्कट से कोई सकारात्मक संकेत मिलता है, तो यह 21वीं सदी की सबसे जटिल कूटनीतिक जीत होगी। दुनिया भर के रणनीतिकार अब इस गुप्त बैठक के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।