तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक
राष्ट्रीय खबर
कोलकाता: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार, 24 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं के नाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं, जिन्हें तार्किक विसंगतियों की श्रेणी में रखा गया है। यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के उस आदेश के बाद की गई है, जिसमें मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
अब जिला निर्वाचन अधिकारी इस सूची को डाउनलोड कर ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित करेंगे, ताकि आम नागरिक अपनी स्थिति की जांच कर सकें। निर्वाचन आयोग के अनुसार, तार्किक विसंगति एक तकनीकी शब्द है, जिसका उपयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित त्रुटियों को शामिल किया गया है।
आयु का अंतर: यदि किसी मतदाता और उसके माता-पिता की दर्ज आयु के बीच का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक है। नाम में बेमेल: मतदाता के दस्तावेजों में माता-पिता के नाम और पुरानी सूची (2002 की मतदाता सूची) में दर्ज नामों के बीच भिन्नता होना। असामान्य डेटा: एक ही व्यक्ति के साथ अत्यधिक संख्या में संतानों का जुड़ा होना या दादा-दादी और पोते-पोतियों की आयु में तर्कहीन अंतर होना।
न्यायालय ने 19 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में इस बात पर चिंता जताई थी कि पश्चिम बंगाल के लगभग 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम इस विवादास्पद सूची में शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि इन मतदाताओं को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
अदालत ने निर्देश दिया कि सूची सार्वजनिक होने के 10 दिनों के भीतर मतदाताओं को अपने दस्तावेज या आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया जाए। सुनवाई के दौरान 10वीं कक्षा (माध्यमिक) के एडमिट कार्ड को भी वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए। मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दी जाए।
इस प्रक्रिया को लागू करने में आयोग को शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, बूथ स्तर के अधिकारियों को संबंधित सॉफ्टवेयर प्राप्त करने में देरी हुई, जिससे शुक्रवार रात तक अनिश्चितता बनी रही। हालांकि, शनिवार शाम तक डेटा अपलोड होने से अब सत्यापन प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल सरकार को भी निर्देश दिया गया है कि वे इन सुनवाई केंद्रों पर पर्याप्त जनशक्ति और सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। यह पूरी कवायद पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिहीन और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।