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देश की नौकरशाही पर लगाम कसने की नई चाल

कैडर आवंटन नीति में संशोधन किया

  • पहले की कैडर आवंटन नीति में बदलाव

  • अब अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार होगा

  • पुरानी व्यवस्था को अब खत्म किया गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत सुधार किया है। केंद्र सरकार ने तीन प्रमुख अखिल भारतीय सेवाओं—भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के लिए कैडर आवंटन की मौजूदा नीति में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। इस नए संशोधन के तहत, पुरानी क्षेत्रीय व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब राज्यों के वर्णानुक्रम पर आधारित एक नई समूह संरचना लागू की गई है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नया ढांचा राज्य सरकारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। यह 2017 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था का स्थान लेगा। इस बदलाव का प्राथमिक उद्देश्य कैडर आवंटन की प्रक्रिया में निष्पक्षता लाना और इसे अधिक सुसंगत बनाना है। नई व्यवस्था के तहत, देश के सभी राज्य और संयुक्त कैडरों को वर्णमाला के क्रम में सजाकर चार विशिष्ट समूहों में विभाजित किया गया है। अब यूपीएससी के सफल उम्मीदवारों को इन समूहों के आधार पर ही अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करनी होंगी।

प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम के गहरे निहितार्थ हैं। इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा देश की नौकरशाही पर अधिक प्रभावी ढंग से लगाम कसने और प्रशासनिक कसावट लाने की दिशा में एक सोचे-समझे कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई समूह संरचना से उम्मीदवारों के लिए अपनी पसंद के राज्यों में पोस्टिंग पाना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक विविधता को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह सुधार नौकरशाही के एलिटिज्म को कम करने और अधिकारियों को अखिल भारतीय स्तर पर कार्य करने के लिए प्रेरित करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

नई समूह संरचना के अनुसार, समूह 1: एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़। समूह 2: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश। समूह 3: महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु। समूह 4: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

इससे पहले की व्यवस्था में, जोन-1 में सात कैडर थे – एजीएमयूटी, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा। जोन-2 में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा शामिल थे, जबकि जोन-3 में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल थे। जोन-4 में पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम-मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड थे, वहीं जोन-V में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल शामिल थे।