Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ... दिल्ली में पूरा हुआ 100 'अटल कैंटीन' का संकल्प: DU मेट्रो स्टेशन से 25 नई कैंटीन शुरू, मात्र ₹5 में ... रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ... खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ रांची में राजद-वाम दलों का साझा मोर्चा: आर्थिक नाकेबंदी और दिल्ली घेराव...

अदाणी ने अमेरिकी अदालत में दलील पेश की

चौदह महीनों तक मामले को टालने के बाद अंततः कार्रवाई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमेरिकी नियामकों द्वारा गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए जाने के 14 महीने बाद, इस मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में इस सप्ताह अदाणी समूह के वकीलों द्वारा पहली बार औपचारिक दलील पेश की गई है।

यह कदम अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग द्वारा दायर धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद उठाया गया है। अदाणी समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख लॉ फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने 23 जनवरी 2026 को जज को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे एसईसी के साथ समन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर बातचीत कर रहे हैं।

यह कानूनी पहल तब शुरू हुई जब भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत समन तामील करने (डिलीवर करने) से दो बार इनकार कर दिया। मंत्रालय ने समन पर हस्ताक्षर और मुहर की कमी जैसे तकनीकी कारणों का हवाला दिया। दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने एसईसी के आंतरिक नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यह समन निर्धारित श्रेणियों में नहीं आता। एसईसी ने इन आपत्तियों को निराधार बताया है और इसे अमेरिकी नियामक के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने वाला कदम करार दिया है।

यह पूरा मामला सितंबर 2021 में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड से जुड़ा है। आरोप है कि गौतम और सागर अदाणी ने अमेरिकी निवेशकों से यह जानकारी छिपाई कि उन्होंने भारत में सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 250 मिलियन डॉलर (करीब 2100 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने की साजिश रची थी। अमेरिकी कानून के तहत, यदि किसी कंपनी का व्यापार या निवेश अमेरिका से जुड़ा है, तो वहां के नियामक भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कर सकते हैं।

एसईसी ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह भारतीय सरकार के माध्यम से समन भेजने की पारंपरिक प्रक्रिया को बाईपास कर दे। इसके बजाय, आयोग अब ईमेल के जरिए या अदाणी के अमेरिकी वकीलों को सीधे समन भेजने की अनुमति मांग रहा है। अदाणी के वकीलों ने अब बातचीत की इच्छा जताकर यह संकेत दिया है कि वे मामले को और अधिक बढ़ने से रोकना चाहते हैं, ताकि अदालती कार्रवाई को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।