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नशे की खेप को उत्पादन स्थलों पर जब्त किया

म्यांमार की सैन्य सरकार ने पहली बार दावा किया

रंगूनः म्यांमार की सैन्य जुंटा  द्वारा नशीली दवाओं की अब तक की सबसे बड़ी खेप जब्त करने का दावा अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब म्यांमार न केवल गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग भी पड़ा हुआ है। सैन्य सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई देश के उन दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में की गई, जो दशकों से अवैध गतिविधियों के गढ़ रहे हैं।

सरकारी मीडिया ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत गुप्त उत्पादन केंद्रों पर छापा मारा। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन, हेरोइन और उच्च गुणवत्ता वाली सिंथेटिक ड्रग्स बरामद की गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि नशीली दवाओं के साथ-साथ परिष्कृत प्रयोगशाला उपकरण और भारी मात्रा में प्रीकर्सर रसायन (दवा बनाने वाले कच्चे पदार्थ) भी मिले हैं। जब्त की गई खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत अरबों डॉलर आंकी जा रही है।

म्यांमार का वह हिस्सा जो थाईलैंड और लाओस की सीमाओं से मिलता है, उसे गोल्डन ट्राइएंगल के नाम से जाना जाता है।

यह क्षेत्र दशकों से अफीम और नशीले पदार्थों की तस्करी का वैश्विक केंद्र रहा है। हाल के वर्षों में, यहाँ पारंपरिक अफीम की खेती के साथ-साथ सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन में भी जबरदस्त उछाल आया है। म्यांमार की सैन्य सरकार इस बड़ी जब्ती को अपनी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है ताकि वह वैश्विक मंच पर अपनी कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाली छवि को सुधार सके।

सैन्य जुंटा के इन दावों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक और मानवाधिकार संगठन इस कार्रवाई को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार की सेना के उच्च अधिकारी और उनसे जुड़े मिलिशिया समूह खुद इन अवैध व्यापारों से आर्थिक लाभ कमाते रहे हैं।

यह आशंका जताई जा रही है कि यह कार्रवाई केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव को कम करने का एक दिखावा या सुनियोजित नाटक हो सकती है। गृहयुद्ध के कारण सेना को संसाधनों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, और ड्रग व्यापार अक्सर युद्ध के लिए धन जुटाने का माध्यम बनता है।

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय की हालिया रिपोर्टों ने चेतावनी दी है कि म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता ने नशीली दवाओं के सिंडिकेट्स को एक सुरक्षित स्वर्ग प्रदान किया है।

अफीम की खेती में हुई वृद्धि और सिंथेटिक ड्रग्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन न केवल म्यांमार के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। शासन की पकड़ कमजोर होने और आर्थिक बदहाली के कारण स्थानीय किसान भी आय के लिए अफीम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।