अमेरिकी दोस्त ने न सिर्फ दगा दिया बल्कि बेइज्जत करने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी। हर बार लेकिन डोनाल्ड ट्रंप यह कहने से नहीं चूकते कि नरेंद्र मोदी उनके अच्छे मित्र है। मित्र को इस तरीके से फंसाना किसी भले आदमी का काम तो नहीं हो सकता। अब तो ट्रंप के सहयोगी भी साहब को औकात बताने लगे हैं। दिल्ली में बैठकर लुटनिक ने कह दिया कि टैरिफ समस्या इसलिए बनी क्योंकि मोदी जी ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन ही नहीं किया।
देश के अंदर एक हथियार था चुनाव आयोग तो नये मुख्य चुनाव आयुक्त को तो नेता प्रतिपक्ष ने इस कदर खींच दिया है कि अब वह प्रेस कांफ्रेंस करने तक से डरने लगे हैं। जाहिर है कि प्रेस कांफ्रेंस किया तो सवाल ऐसे पूछे जाएंगे, जिससे मिर्ची लग जाएगी। अब हर जगह पर इंदौर जैसा घंटा सवाल कहने वाले भी नहीं बचे हैं।
लेकिन बेचारे घंटा मंत्री को भी एहसास हो गया कि जब सही में पत्रकार सवाल पूछने लगते हैं तो क्या होता है। शायद इसी वजह से मोदी जी ने सावधानी बरती और अब तक एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं किया। महाराष्ट्र में भी भाजपा नेतृत्व की नहीं चली और तमाम प्रत्याशियों ने आपस में नया गठबंधन बनाकर पार्टी लाइन को कचड़े में डाल दिया। अब तो इसके बदले अंबरनाथ विकास अघाड़ी जैसा संगठन जमीन पर उतर चुका है।
इसी बात पर एक पुरानी फिल्म का यह गीत याद आ रहा है। फिल्म एक साल के लिए इस गीत को लिखा था प्रेम धवन ने और संगीत में ढाला था रवि ने। इस गीत को लता मंगेशकर और तलत अजीज ने अपना स्वर दिया था। गीत को बोल कुछ इस तरह हैं।
न पूछो प्यार की हमने वो हक़ीक़त देखी
वफ़ा के नाम पे बिकती हुई उल्फ़त देखी
किसी ने लूट लिया और हमें ख़बर न हुई
खुली जो आँख तो बर्बाद मुहब्बत देखी
सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया
दिन में अगर चराग़ जलाए तो क्या किया
मैं वो कली हूँ जो न बहारों में खिल सकी
मैं वो कली हूँ जो न बहारों में खिल सकी
वो दिल हूँ जिसको प्यार की मंज़िल न मिल सकी
मंज़िल न मिल सकी
पत्थर पे हमने फूल चढ़ाए तो क्या किया
जो मिल न सका प्यार ग़म की शाम तो मिले
जो मिल न सका प्यार ग़म की शाम तो मिले
इक बेवफ़ा से प्यार का अंजाम तो मिले
ऐ मौत जल्द आ, ऐ मौत जल्द आ
ज़रा आराम तो मिले
दो दिन ख़ुशी के देख न पाए तो क्या किया
करते रहे ख़िज़ाँ से हम सौदा बहार का
बदला दिया तो क्या ये दिया उनके प्यार का
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
दिन में अगर चराग़ जलाये तो क्या किया?
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
हम बदनसीब प्यार की रुसवाई बन गये
हम बदनसीब प्यार की रुसवाई बन गये
ख़ुद ही लगा के आग तमाशाई बन गये,
तमाशाई बन गये
दामन से अब ये शोले बुझाये तो क्या किया?
दिन में अगर चराग़ जलाये तो क्या किया?
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
ले-ले के हार फूलों के आई तो थी बहार
ले-ले के हार फूलों के आई तो थी बहार
नज़रें उठाके हमने ही देखा न एक बार
देखा न एक बार
आँखों से अब ये परदे हटाये तो क्या किया?
दिन में अगर चराग़ जलाये तो क्या किया?
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया
जो कुछ बचा था वह रौब भी अब खत्म होने जा रहा है। पहले झारखंड में हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की दांव तो चल गयी पर अदालत में पूरे मामले की भद पिट गयी। अब कोलकाता में ममता बनर्जी ने सीधे दो दो हाथ क्या कर दिया, मोदी जी की एजेंसी के हाथ पांव फूल रहे हैं। दो दो मामला दर्ज हो गया।
तमिलनाडू में एक ही अफसर को वहां की पुलिस ने खदेड़कर पकड़ लिया था। उसे बचाने में सांस फूल गयी थी। यहां तो सारे अफसरों पर शामत सी आ पड़ी है। जिसे मोदी सरकार अपना सबसे धारदार तलवार समझती थी, उसे तो ममता बनर्जी में मक्खन लगाने वाले चाकू में तब्दील कर दिया है। अब बेचारे करें तो क्या करें। ऊपर के मोदी जी के खेल मंत्री ने मोहन बगान को मोहन बैगन कहकर बंगालियों को अलग तरीके से नाराज कर लिया है। अब थाली का बैगन बनकर इधर उधर लुढ़कते रहिए।