Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
NEET Exam Stress: लातूर में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के तनाव में NEET छात्रा ने की खुदकुशी Bakrid 2026: बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें मुस्लिम समुदाय; ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड की बड़ी अ... J&K NIA Raid: जम्मू-कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई; शोपियां और श्रीनगर के कई ठिकानों पर छापेमारी Karnataka River Accident: कर्नाटक के भटकल में बड़ा हादसा; नदी में सीपियां निकालने गए एक ही परिवार के... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में जिगरी दोस्त की पत्नी को लेकर फरार हुआ युवक; चाकू लेकर घर पर बोला ध... Delhi-Gurugram Traffic: द्वारका एक्सप्रेसवे मायापुरी रिंग रोड तक बढ़ेगा; दिल्ली-गुरुग्राम के बीच 55%... Mamata Banerjee News: ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला, बोलीं- 'देखूंगी संविधान में ज्यादा ताकत है... Ganga Dussehra Haridwar: हरिद्वार में गंगा दशहरा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब; हर की पैड़ी पर लगी... Palwal Rajak Case: पलक रजक मौत मामले में आरोपी पति अमित का सरेंडर; सास और देवर अब भी फरार Falta Bypoll Result: फालता में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत; देबांग्शु पांडा ने 1.09 लाख वोटों से दर्ज की ...

ग्रामीण विद्युतीकरण में सौ फीसद सफलता का दावा झूठा

सीएजी की रिपोर्ट ने मोदी सरकार के प्रचार की हवा निकाल दी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के कोने-कोने, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सरल बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत की थी। सरकार का दावा था कि उसने 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। हालांकि, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट ने इन दावों की कलई खोल कर रख दी है। संसद में पेश इस रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं में न केवल भारी वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं, बल्कि जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है।

कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार की फ्लैगशिप योजना राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम बदलकर मोदी सरकार ने इसे दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर शुरू किया था। इस योजना के तहत कुल 605 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 494 परियोजनाओं में नियमों का घोर उल्लंघन पाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, किन गांवों में बिजली पहुँचानी है, इसके लिए समय पर उचित सर्वेक्षण तक नहीं किया गया। राज्यों की समितियों को दरकिनार कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सीधे केंद्र को सौंपी गई और केंद्र ने बिना किसी जांच-पड़ताल के उन्हें स्वीकार भी कर लिया।

कैग ने वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने कई राज्यों को काम शुरू होने से बहुत पहले ही करोड़ों रुपये आवंटित कर दिए। उदाहरण के तौर पर, 542 करोड़ रुपये उन मामलों में दिए गए जहाँ एजेंसी की नियुक्ति धन मिलने के साल भर बाद हुई। कुल मिलाकर, लगभग 1,604 करोड़ रुपये नियमों के विरुद्ध समय से पहले जारी कर दिए गए। सौभाग्य योजना के मामले में सरकार ने मार्च 2019 तक 100 फीसद लक्ष्य (करीब 3 करोड़ घर) पूरा करने की घोषणा की थी, लेकिन कैग की जांच में सामने आया कि उस अवधि तक केवल 1.52 करोड़ घरों को ही कनेक्शन मिल पाया था। रिपोर्ट के अनुसार, 7 राज्यों में अब भी 19 लाख से अधिक घर अंधेरे में हैं। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि 17,000 घरों में दो बार कनेक्शन दिखाकर ठेकेदारों ने दोहरी राशि डकारी। यहाँ तक कि सरकारी एजेंसियों ने उपलब्ध बजट के बावजूद बाजार से ऊंचे ब्याज पर 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जिसका बड़ा हिस्सा बिना उपयोग के पड़ा रहा और जनता के पैसे से उसका भारी ब्याज चुकाया गया।