Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
NEET Exam Stress: लातूर में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के तनाव में NEET छात्रा ने की खुदकुशी Bakrid 2026: बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें मुस्लिम समुदाय; ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड की बड़ी अ... J&K NIA Raid: जम्मू-कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई; शोपियां और श्रीनगर के कई ठिकानों पर छापेमारी Karnataka River Accident: कर्नाटक के भटकल में बड़ा हादसा; नदी में सीपियां निकालने गए एक ही परिवार के... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में जिगरी दोस्त की पत्नी को लेकर फरार हुआ युवक; चाकू लेकर घर पर बोला ध... Delhi-Gurugram Traffic: द्वारका एक्सप्रेसवे मायापुरी रिंग रोड तक बढ़ेगा; दिल्ली-गुरुग्राम के बीच 55%... Mamata Banerjee News: ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला, बोलीं- 'देखूंगी संविधान में ज्यादा ताकत है... Ganga Dussehra Haridwar: हरिद्वार में गंगा दशहरा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब; हर की पैड़ी पर लगी... Palwal Rajak Case: पलक रजक मौत मामले में आरोपी पति अमित का सरेंडर; सास और देवर अब भी फरार Falta Bypoll Result: फालता में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत; देबांग्शु पांडा ने 1.09 लाख वोटों से दर्ज की ...

हंगामा होने लगा तो पलटी मार गया भारतीय चुनाव आयोग

बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं की सुनवाई अब घर बैठे होगी

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने एक बेहद मानवीय और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नई विज्ञप्ति के अनुसार, अब 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को मतदाता सूची से संबंधित सुनवाई के लिए मतदान केंद्रों या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आयोग अब स्वयं इन मतदाताओं के घर जाकर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करेगा।

यह निर्णय पिछले शनिवार को शुरू हुई सुनवाई प्रक्रिया के दौरान सामने आई दुखद तस्वीरों के बाद लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बुजुर्गों को लंबी लाइनों में खड़ा देखा गया, यहाँ तक कि कुछ बीमार मतदाता एम्बुलेंस के जरिए सुनवाई केंद्रों तक पहुँचने को मजबूर थे। इन घटनाओं ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इसके जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि जो लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जो महिलाएं गर्भवती हैं या जिनकी आयु 85 वर्ष पार कर चुकी है, उनके लिए बीएलओ और ईआरओ घर जाकर सत्यापन करेंगे।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि यदि इन तीन श्रेणियों के मतदाता लिखित अनुरोध करते हैं, तो उन्हें भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर संवेदनशीलता से कार्य करें। हालांकि, 85 वर्ष से कम आयु के स्वस्थ मतदाताओं को निर्धारित केंद्रों पर ही आना होगा।

इसी बीच, सोमवार को केंद्रीय रोल ऑब्जर्वर सी. मुरुगन पर हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सीईओ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है। आयोग ने जिलाधिकारियों के माध्यम से राज्य पुलिस को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करने का भी सुझाव दिया है, ताकि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।