ब्रह्मांड के अज्ञात इलाके से आया धूमकेतु ने फिर चौंकाया
-
एक अद्भुत यात्रा और अप्रत्याशित परिवर्तन
-
हार्वर्ड का विश्लेषण और रहस्यमयी ताकतें
-
नीले रंग पर अब होगा आगे का शोध
राष्ट्रीय खबर
रांचीःब्रह्मांड के सुदूर कोनों से हमारे सौर मंडल में प्रवेश करने वाले अंतरतारकीय पिंड हमेशा से ही वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों के लिए कौतूहल का विषय रहे हैं। जुलाई 2025 में खोजा गया तीसरा अंतरतारकीय धूमकेतु 3 आई एटलस दिसंबर 2025 में पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरते हुए एक रहस्यमय और अद्वितीय खगोलीय घटना का साक्षी बना। इस धूमकेतु ने न केवल अपनी असाधारण चमक, बल्कि अपने अप्रत्याशित नीले रंग से भी खगोलविदों को अचंभित कर दिया है, जिससे ब्रह्मांड के नियमों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
सौर मंडल के बाहर से आया यह रहस्यमयी आगंतुक, 3 आई एटलस, लगभग 26.9 करोड़ किलोमीटर की दूरी से पृथ्वी के पास से गुजरा। अपनी इस यात्रा के दौरान, जैसे-जैसे यह सूर्य के करीब आया, इसकी चमक में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई। वैज्ञानिकों ने बताया कि इसकी चमक सामान्य से 16 गुना अधिक हो गई, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना थी। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इसकी चमक बढ़ने के साथ ही इसका रंग गहरा नीला हो गया। आमतौर पर धूमकेतु सूर्य के करीब आने पर हरे या पीले रंग के दिखते हैं, जो उनके वाष्पीकृत होने वाले पदार्थ (जैसे कार्बनिक अणु) के कारण होता है। ऐसे में नीले रंग का दिखना एक बड़ी पहेली बन गया है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खगोलविदों ने इस धूमकेतु के व्यवहार पर गहन अध्ययन किया है। उनके प्रारंभिक विश्लेषण बताते हैं कि 3 आई एटलस की गति और उसके प्रक्षेपवक्र पर केवल ज्ञात गुरुत्वाकर्षण बल ही काम नहीं कर रहे हैं। प्रोफेसर एलिजाबेथ रीड के नेतृत्व में एक टीम ने संकेत दिया है कि इसकी गति और ऊर्जा उत्सर्जन में कुछ रहस्यमयी ताकतें या अज्ञात भौतिकी के नियम काम कर सकते हैं, जिन्हें हम अभी तक पूरी तरह से नहीं समझते हैं। यह संभावना खगोल भौतिकी के स्थापित मॉडलों को चुनौती दे रही है और नए शोध के लिए प्रेरणा दे रही है।
नीले रंग का सटीक कारण अभी भी जांच का विषय है। एक सिद्धांत यह है कि धूमकेतु में असामान्य रासायनिक संरचना हो सकती है, जिसमें ऐसे भारी धातु के आयन या विशेष अणु शामिल हों जो सूर्य के विकिरण के संपर्क में आने पर नीली रोशनी उत्सर्जित करते हों। एक अन्य संभावना यह भी है कि इसमें अत्यधिक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड या अन्य विशेष गैसें हों जो अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश में नीले स्पेक्ट्रम को दर्शाती हैं।
31 आई एटलस की यह खोज हमें अंतरतारकीय अंतरिक्ष में मौजूद पिंडों की विविधता और जटिलता के बारे में नई जानकारी प्रदान करती है। वैज्ञानिक अब भविष्य में ऐसे और अधिक अंतरतारकीय धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों का पता लगाने और उनका विश्लेषण करने के लिए उत्साहित हैं, ताकि ब्रह्मांड के इन अजनबियों के रहस्यों को सुलझाया जा सके।
#अंतरतारकीयधूमकेतु #अंतरिक्षरहस्य #नीलाधूमकेतु #खगोलविज्ञानसमाचार #धूमकेतुएटलस #InterstellarComet #SpaceMystery #BlueComet #CometATLAS #AstronomyNews