पुलिस कर्मी ने छुए पैर और आरोप लगे
राष्ट्रीय खबर
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब बागेश्वर धाम के प्रमुख और प्रसिद्ध आध्यात्मिक उपदेशक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सरकारी विमान से रायपुर पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो ने न केवल सरकारी संसाधनों के उपयोग पर सवाल खड़े किए, बल्कि एक ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी द्वारा उनके पैर छूने की घटना ने इस विवाद की आग में घी डालने का काम किया है। अब इस मुद्दे पर कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि धीरेंद्र शास्त्री राज्य के मंत्री गुरु खुशवंत साहब के साथ सरकारी विमान से रायपुर हवाई अड्डे पर उतरे। जैसे ही वे विमान से बाहर आए, वहां तैनात एक वर्दीधारी पुलिस अधिकारी ने पहले प्रोटोकॉल के तहत मंत्री को सलामी दी। इसके तुरंत बाद, उस अधिकारी ने अपनी पुलिस की टोपी उतारी, जूते निकाले और पूरी श्रद्धा के साथ झुककर धीरेंद्र शास्त्री के पैर छुए। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर वर्दी की गरिमा बनाम व्यक्तिगत आस्था की एक नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार की कड़ी घेराबंदी की है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसे सार्वजनिक धन की खुली बर्बादी और सरकारी तंत्र का घोर दुरुपयोग करार दिया। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर किस संवैधानिक प्रावधान के तहत एक धार्मिक उपदेशक के लिए सरकारी विमान की व्यवस्था की गई? शुक्ला ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास और पाखंड को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सनातन धर्म समावेशी है, जबकि शास्त्री के कृत्य सामाजिक सद्भाव के विपरीत हैं। उन्होंने इसे राजकोष पर अनावश्यक बोझ बताया।
दूसरी ओर, भाजपा ने इस हमले का कड़ा जवाब देते हुए अधिकारी और शास्त्री दोनों का बचाव किया है। भाजपा प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडेय ने तर्क दिया कि किसी गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करना पूरी तरह से एक व्यक्ति की निजी आस्था का मामला है। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए पूछा कि जब मुस्लिम कर्मचारी कार्यस्थल पर नमाज पढ़ते हैं, तब कांग्रेस को आपत्ति क्यों नहीं होती? पांडेय ने पिछली कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में तांत्रिकों के लिए हेलीकॉप्टर कैसे उड़ाए जाते थे।
फिलहाल, रायपुर के माना बस्ती थाने में पदस्थ उस थाना प्रभारी के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है। हालांकि, यह मामला अब केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, आधिकारिक प्रोटोकॉल और सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे गंभीर संवैधानिक प्रश्नों के इर्द-गिर्द सिमट गया है।