वन अधिकारी की संपत्ति देख हैरान हुआ छापामार दल
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वर/कोरापुट: ओडिशा में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान में सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोरापुट वन प्रभाग में कार्यरत फॉरेस्टर निरंजन सत्पथी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई छापेमारी ने सबको चौंका दिया है। विभाग द्वारा एक साथ पांच अलग-अलग ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की ऐसी चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है, जो उनकी वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक प्रतीत होती है।
आलीशान इमारतें और बेशकीमती जमीनें विजिलेंस की टीम ने जब सत्पथी के ठिकानों की तलाशी ली, तो वहां अचल संपत्तियों की लंबी सूची सामने आई। भुवनेश्वर के पॉश इलाके झारपाड़ा में उनके पास दो विशाल तीन-मंजिला इमारतें मिली हैं, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल लगभग 4050 वर्ग फुट है।
इसके अतिरिक्त, सिमिलिगुड़ा में भी उनका 1250 वर्ग फुट का एक निजी भवन पाया गया है। केवल इमारतें ही नहीं, बल्कि सत्पथी और उनके परिवार के नाम पर कुल 7 उच्च मूल्य वाले भूखंडों (प्लॉट्स) के दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें से 2 प्लॉट भुवनेश्वर के प्राइम लोकेशन पर हैं, 4 जगतसिंहपुर शहर में और 1 सिमिलिगुड़ा में स्थित है। विजिलेंस की तकनीकी शाखा वर्तमान में इन सभी संपत्तियों के बाजार मूल्य का सटीक आकलन कर रही है।
सोना, नकदी और विदेशी मुद्रा का अंबार छापेमारी के दौरान न केवल जमीन-जायदाद, बल्कि भारी मात्रा में कीमती धातुएं और नकदी भी बरामद की गई है। अधिकारियों को सत्पथी के घर से लगभग 1 किलोग्राम सोने के आभूषण और 250 ग्राम चांदी के गहने मिले हैं। इसके अलावा, 9,28,500 रुपये की भारतीय मुद्रा नकद बरामद की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके पास से कई देशों की विदेशी मुद्राएं भी मिली हैं, जिनमें अमेरिकी डॉलर, इंडोनेशियाई रुपिया, मकाऊ पटाका, थाईलैंड भट, हांगकांग डॉलर, वियतनामी डोंग और मलेशियाई रिंगित शामिल हैं।
आधुनिक निवेश और विलासिता का जीवन फॉरेस्टर सत्पथी का निवेश पारंपरिक संपत्तियों तक ही सीमित नहीं था। जांच में पाया गया कि उन्होंने बैंक और बीमा में 66.42 लाख रुपये जमा कर रखे हैं, जिसमें 1.66 लाख रुपये का निवेश क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन) में भी किया गया है। उनके पास 28.75 लाख रुपये मूल्य की गाड़ियां हैं, जिनमें एक टाटा हैरियर और तीन दोपहिया वाहन शामिल हैं। घर के भीतर मौजूद साजो-सामान की कीमत भी करीब 30.75 लाख रुपये आंकी गई है।
निरंजन सत्पथी के करियर की शुरुआत 22 जनवरी, 1988 को कोरापुट वन प्रभाग में एक मामूली फॉरेस्ट गार्ड के रूप में हुई थी, तब उनका मासिक वेतन मात्र 625 रुपये था। साल 2014 में उन्हें फॉरेस्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। पिछले 37 वर्षों से एक ही जिले में जमे रहकर उन्होंने इतनी विशाल संपत्ति कैसे अर्जित की, सतर्कता विभाग इसी कड़ी को जोड़ने में जुटा है। विभाग को अंदेशा है कि जांच आगे बढ़ने पर अभी और भी कई बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों का खुलासा हो सकता है।