दक्षिण कोरिया में राजद्रोह अदालतों के गठन से हलचल
सिओलः दक्षिण कोरिया इस समय अपने आधुनिक लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे अस्थिर और गंभीर दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा हाल ही में अचानक लागू किए गए मार्शल लॉ के असफल प्रयास ने देश की राजनीति में एक ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।
इस घटनाक्रम के जवाब में, दक्षिण कोरियाई नेशनल असेंबली (संसद) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए विशेष राजद्रोह अदालतों के गठन का विधेयक पारित किया है। इन विशेष अदालतों का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रपति, उनके करीबी मंत्रियों और उन सैन्य कमांडरों की जवाबदेही तय करना है, जिन्होंने लोकतंत्र को ताक पर रखकर सैन्य शासन थोपने की कोशिश की थी।
संसद के इस फैसले ने सियोल की सड़कों पर उमड़े जन-आक्रोश को एक कानूनी दिशा दे दी है। हज़ारों की संख्या में नागरिक कड़ाके की ठंड के बावजूद राष्ट्रपति के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति ने अपनी गिरती लोकप्रियता और राजनीतिक दबाव से बचने के लिए असंवैधानिक तरीके से सेना का सहारा लिया, जो सीधे तौर पर राजद्रोह की श्रेणी में आता है। इन नई गठित अदालतों को विशेष शक्तियाँ दी गई हैं ताकि वे बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से साक्ष्य जुटा सकें और उच्च-स्तरीय सैन्य व राजनीतिक अधिकारियों को तलब कर सकें।
इस संकट का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने दक्षिण कोरिया की मजबूत मानी जाने वाली अर्थव्यवस्था को भी हिला दिया है। वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता के कारण दक्षिण कोरियाई मुद्रा वोन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और सियोल स्टॉक एक्सचेंज में अस्थिरता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका और जापान, इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि उत्तर कोरिया के साथ जारी तनाव के बीच दक्षिण कोरिया की आंतरिक स्थिरता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दक्षिण कोरियाई लोकतंत्र की परिपक्वता की एक बड़ी परीक्षा है। यदि ये विशेष अदालतें राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने में सफल रहती हैं, तो यह भविष्य के लिए एक मिसाल कायम करेगा। लेकिन, यदि राष्ट्रपति पद के विशेषाधिकारों और कानूनी दांव-पेंचों के कारण न्याय में देरी होती है, तो देश में नागरिक अशांति और बढ़ सकती है। आने वाले सप्ताह दक्षिण कोरिया के भविष्य और उसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का फैसला करेंगे।