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तापमान गिरने और पाला पड़ने से अब नई परेशानी

चाय उत्पादक किसानों के सामने नई चुनौती

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः दक्षिण भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों, केरल के मुन्नार और तमिलनाडु के नीलगिरी में गिरते तापमान और पाले ने चाय की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले कुछ दिनों में तापमान शून्य डिग्री तक पहुँचने के कारण चाय के बागानों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे आगामी उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

मुन्नार क्षेत्र में लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल के नुकसान का अनुमान है, जिससे अगले तीन महीनों के उत्पादन चक्र पर असर पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार, चेंदुवरई, साइलेंट वैली और देविकुलम जैसे इलाकों में तापमान 0 से 1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है।

हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड के उपाध्यक्ष अनिल जॉर्ज ने बताया कि 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लॉकहार्ट एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भीषण पाला देखा गया है। अत्यधिक ठंड के कारण चाय की झाड़ियों की पत्तियां झड़ने लगी हैं, जिसे डिफोलिएशन कहा जाता है। अकेले लॉकहार्ट एस्टेट का लगभग 14.3 प्रतिशत हिस्सा इस ठंड की चपेट में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असामान्य मौसम के पीछे साइबेरियन हाई और कैटबैटिक फ्लो जैसी भौगोलिक घटनाएं जिम्मेदार हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएं इस साल दक्षिण की ओर मुड़ गई हैं, जिससे रात के समय घाटियों में ठंडी हवा जमा होकर पाले का रूप ले लेती है।

इस संकट ने छोटे चाय उत्पादकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नीलगिरी बोट टी लीफ मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजयन कृष्णमूर्ति के अनुसार, नीलगिरी में अधिकांश बागान छोटे किसानों के हैं और फसल खराब होने से उनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। केरल के कुल चाय उत्पादन में मुन्नार की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। यदि मौसम जल्द ही सामान्य नहीं हुआ, तो चाय उद्योग को करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ सकता है। उत्पादक अब बारिश और उच्च आर्द्रता की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि झाड़ियों को पुनर्जीवित किया जा सके।