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डेनमार्क में 400 साल पुरानी डाक सेवा खत्म कर दी गयी

वैज्ञानिक तरक्की की वजह से एक बेहतर सांस्कृतिक सेवा का अंत

कोपेनहेगेनः गत 21 दिसंबर 2025 को डेनमार्क के इतिहास में एक अत्यंत भावुक लेकिन अनिवार्य अध्याय का अंत हो गया। डेनिश सरकार और वहां की आधिकारिक डाक सेवा, पोस्टनोर्ड ने अपनी चार शताब्दी पुरानी होम-डिलीवरी सेवा को आधिकारिक रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। सन 1624 में राजा क्रिश्चियन चतुर्थ द्वारा स्थापित की गई यह डाक सेवा कभी डेनिश साम्राज्य और वहां के समाज की धड़कन मानी जाती थी, जिसने युद्धों, महामारियों और औद्योगिक क्रांतियों के दौर में भी देश को जोड़े रखा।

इस कठोर निर्णय के पीछे सबसे बड़ा कारण डिजिटल क्रांति है। पिछले दो दशकों में डेनमार्क दुनिया के सबसे अधिक डिजिटल रूप से साक्षर देशों में उभरकर सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2000 की तुलना में व्यक्तिगत पत्रों और कागजी बिलों की संख्या में 90 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई है।

आज डेनमार्क के नागरिक अपने करों का भुगतान करने से लेकर, सरकारी सूचनाएं प्राप्त करने और व्यक्तिगत संदेश भेजने तक के लिए ई-मेल, ई-बॉक्स और अन्य डिजिटल पोर्टल्स का उपयोग करते हैं। ऐसे में, खाली डाक वैनों का सड़कों पर घूमना न केवल आर्थिक रूप से घाटे का सौदा था, बल्कि कार्बन उत्सर्जन के लिहाज से पर्यावरणीय रूप से भी अनुचित था।

डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि डाकघरों को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि उनके कार्य करने का तरीका बदल रहा है। अब ई-कॉमर्स के दौर को देखते हुए केवल पार्सल और विशेष पंजीकृत डाक की ही होम-डिलीवरी की जाएगी। सामान्य चिट्ठियों के लिए सरकार ने जगह-जगह डिजिटल कियोस्क और सामुदायिक संग्रह केंद्र स्थापित किए हैं। अब यदि कोई पत्र भेजता भी है, तो उसे इन केंद्रों पर जाकर खुद प्राप्त करना होगा।

यह बदलाव विशेष रूप से उन बुजुर्गों के लिए चुनौतीपूर्ण है जो आज भी कागज-कलम और डाकिया के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं। हालांकि, सरकार ने इन बुजुर्गों की सहायता के लिए विशेष डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र खोले हैं। डेनमार्क का यह कदम पूरे यूरोप के लिए एक नज़ीर बन गया है। स्वीडन, नॉर्वे और नीदरलैंड जैसे देश भी अब इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि तकनीक की गति कभी-कभी सदियों पुरानी परंपराओं को इतिहास की किताबों तक सीमित कर देती है। 1624 में घोड़ों पर शुरू हुई यह यात्रा 2025 में स्मार्टफोन की स्क्रीन पर आकर समाप्त हुई है।