Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीछे हटने को कतई तैयार नहीं है जेन जेड वाले तेलचट्टे नागरिकता नहीं तो पासपोर्ट आखिर क्या हैः थरूर यह कहां आ गये हैं यूंही साथ चलते चलते.. .. .. Gulmarg Accident: बारामूला में शेल फटने से बड़ा हादसा; मृतक की पहचान हुई, प्रशासन ने झूठी खबरों के खि... PM Modi Seychelles Visit: सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी; हिंद महासागर में भारत की बढ़ेगी र... Delhi BJP Organization: दिल्ली भाजपा ने 11 संगठनात्मक जिलों की नई टीम घोषित की; 33% महिलाओं को मिला ... Delhi Police Controversy: आदर्श नगर में पुलिस सब-इंस्पेक्टर पर महिलाओं को थप्पड़ मारने का आरोप; CCTV... Pakistan Mobile Network in J&K: जम्मू-कश्मीर सीमा के अंदर आ रहे पाकिस्तानी मोबाइल सिग्नल; सुरक्षा एज... Datia News: दतिया के मंदिर में ताजियों की सलामी; 200 साल पुरानी परंपरा से दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की... Kanpur Crime News: महंत पर हमले का आरोपी हिस्ट्रीशीटर अजय ठाकुर गिरफ्तार? वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

सुप्रीम कोर्ट ने 10 डेंटल कॉलेजों पर लगाया जुर्माना

एनईईटी फेल कर गये छात्रों को भी मिल गया दाखिला

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने मेडिकल और डेंटल शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों को एक कड़ा और ऐतिहासिक संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर नियमों का घोर उल्लंघन करने के आरोप में कुल ₹100 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। इन कॉलेजों ने शैक्षणिक सत्र 2016-17 के दौरान उन छात्रों को बीडीएस  पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया था, जो राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में न्यूनतम योग्यता अंक (क्वालीफाइंग मार्क्स) प्राप्त करने में विफल रहे थे। अदालत ने प्रत्येक कॉलेज को ₹10-10 करोड़ की राशि जुर्माने के तौर पर जमा करने का आदेश दिया है।

गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं जस्टिस की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिक्षा, विशेष रूप से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता राष्ट्र के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा, जब छात्र नीट जैसी अनिवार्य परीक्षा में ही विफल हो गए थे, तो किस आधार पर उन्हें डॉक्टर बनाने के लिए प्रवेश दिया गया? अदालत ने इसे शिक्षा प्रणाली को दूषित करने का प्रयास माना और स्पष्ट किया कि व्यावसायिक लाभ के लिए नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

2007 के नियमों की अनदेखी पूरा विवाद 2016-17 के सत्र से जुड़ा है। उस समय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार देशभर में मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ‘नीट‘ को एकमात्र आधार बनाया गया था। इसके बावजूद, राजस्थान के इन 10 निजी कॉलेजों ने वर्ष 2007 के पुराने और अप्रासंगिक नियमों का हवाला देते हुए अयोग्य छात्रों को पिछले दरवाजे से दाखिला दे दिया। यह मामला कई वर्षों तक कानूनी दांव-पेंच में फंसा रहा, जिससे न केवल शैक्षणिक मानकों पर सवाल उठे, बल्कि उन छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया जिन्होंने गलत तरीके से प्रवेश लिया था।

शिक्षा सुधार में खर्च होगी राशि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जुर्माने से प्राप्त होने वाली 100 करोड़ की इस विशाल राशि का उपयोग चिकित्सा शिक्षा के ढांचे में सुधार, गरीब मेधावी छात्रों की सहायता या अन्य निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन निजी संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगेगी जो मोटी फीस के लालच में योग्यता की अनदेखी करते हैं। यह निर्णय भविष्य की दाखिला प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।